ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की पहली टनल की निकास सुरंग का आज ब्रेकथ्रू होगा, जबकि मुख्य सुरंग जनवरी तक आर-पार हो जाएगी।
ऋषिकेश। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की पहली टनल की निकास सुरंग शुक्रवार को आर-पार (ब्रेकथ्रू) होगी। मुख्य सुरंग जनवरी तक आर-पार हो जाएगी। ढालवाला से नीर गडडू तक यह करीब दस किलोमीटर की सुरंग है। पहली सुरंग को आर-पार करने में रेल विकास निगम लिमिटेड को समय लग रहा था।
125 किलोमीटर की ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में कुल 28 सुरंग हैं। इसमें से 22 सुरंगों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना में मुख्य के साथ ही निकास सुरंग भी बनाई ज रही है। परियोजना की पहली सुरंग को आर-पार करने में ही सबसे अधिक दिक्कत आ रही थी।
ऋषिकेश के पास ढालवाला से शुरू हो रही यह सुरंग परियोजना का सबसे संवेदनशील हिस्से में है। जहां बड़ी भूगर्भीय दरार है। इसलिए बेहर सावधानी के साथ इंजीनियरों ने यहां काम किया। अब यहां निकास सुरंग का काम पूरा हो चुका है। शुक्रवार को शाम तीन बजे इसे आर-पार कर दिया जाएगा। मुख्य सुरंग का काम करीब डेढ़ किलोमीटर का बचा हुआ है। इसे जनवरी तक पूरा करने की तैयारी चल रही है।
अब तक डेढ़ किलोमीटर का बिछाया गया ट्रैक
परियोजना में इसी साल मई माह से ट्रैक बिछाने का काम भी शुरू कर दिया गया है। शिवपुरी से गूलर के बीच डेढ़ किलोमीटर का ट्रैक सुरंग के अंदर बिछ गया है। यहां छह किलोमीटर का ट्रैक बिछाया जाना है। कर्णप्रयाग तक ट्रेन को दो चरणों में पहुंचाया जाना है।
पहले चरण में योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से ब्यासी स्टेशन के बीच जून 2028 तक ट्रेन का संचालन करने की तैयारी है। इन स्टेशनों के बीच की दूरी 27 किलाेमीटर है। ब्यासी से कर्णप्रयाग तक दिसंबर 2029 तक ट्रेन पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यह दूरी करीब 92 किलोमीटर की है।
ओएचई का काम दो चरणों में होगा
परियोजना में इलेक्ट्रिकल से जुड़े काम भी किए जाने हैं। पहले चरण में ब्यासी तक जनरल पावर सप्लाई, फायर टेंडर, टनलों में वेटिंलेशन का काम किया जाएगा। इस पर 434 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
ओवर हैड इक्यूपमेंट (ओएचई) लगाने का काम भी किया जाना है। यह काम दो चरणों में होगा। पहले चरण में श्रीनगर तक सौ करोड़ की लागत से काम होगा। उसके बाद इतनी ही लागत से कर्णप्रयाग तक काम किया जाना है।
परियोजना पर एक नजर
- कुल लंबाई – 125 किलोमीटर
- नए स्टेशन – 12
- यात्री ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किमी प्रति घंटा
- मालागाड़ियों की अधिकतम गति 65 किमी प्रति घंटा
- पुलों की संख्या 19
- मुख्य निकास सुरंगों की कुल लंबाई 213 किमी
परियोजना की पहली टनल की निकास सुरंग आज आर-पार होगी। मुख्य सुरंग का करीब डेढ़ किलोमीटर का काम बचा हुआ है। यह काम जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। – ओपी मालगुड़ी, उप महाप्रबंधक सिविल, आरवीएनएल