भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कांग्रेस के 7000 बीघा जमीन के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कांग्रेस से अपने शासनकाल के भूमि आवंटनों का हिसाब देने और विकास विरोधी नैरेटिव न बनाने को कहा।
देहरादून। कांग्रेस ने यूआइआइडीबी के बहाने सरकार को घेरने के लिए जमीन का मुद्दा उठाया तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यूआइआइडीबी के नाम पर फिलहाल केवल 18 हेक्टेयर भूमि है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि सरकारी जमीन पर सवाल उठाने से पहले वह अपने शासनकाल में हुए भूमि आवंटनों का हिसाब जनता को क्यों नहीं देती।
भट्ट ने कहा कि कांग्रेस 2027 के चुनाव से पहले विकास के खिलाफ राजनीतिक नैरेटिव बनाना चाहती है। कहा कि कांग्रेस धामी सरकार के निवेश माडल को कठघरे में खड़ा करना चाहती है, जबकि यूआइआइडीबी का उद्देश्य सरकारी जमीन बेचना नहीं, बल्कि अनुपयोगी भूमि का आर्थिक उपयोग कर निवेश, रोजगार और राजस्व बढ़ाना है।
भाजपा ने कांग्रेस के सात हजार बीघा वाले दावे के आरोपों के जवाब में 18 हेक्टेयर का आंकड़ा सामने रखा। भट्ट के मुताबिक भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा और निवेश के लिए नियमों के तहत लीज माडल अपनाया जाएगा।
भट्ट ने कांग्रेस को उसके ही शासनकाल के भूमि आवंटनों की याद दिलाते हुए देहरादून आइटी पार्क, सिटी पार्क और सिडकुल से जुड़े मामलों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि आइटी उद्योग के लिए निर्धारित जमीन का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों में होने के आरोपों पर कांग्रेस क्या जवाब देगी।
वर्ष 2006 में सिडकुल के माध्यम से सुपरटेक और प्लेनेट इंफ्रा को भूमि आवंटन तथा 2013 में देहरादून आइटी पार्क में जीटीएम बिल्डर को जमीन दिए जाने का मामला भी उन्होंने उठाया। भट्ट ने दावा किया कि कांग्रेस के आरोप पत्र समिति के अध्यक्ष करन माहरा ने आइटी पार्क में सिक्का कंपनी को जमीन दिए जाने का उल्लेख किया है।
भाजपा का सवाल है कि यदि कांग्रेस को आज सरकारी भूमि के इस्तेमाल पर आपत्ति है तो वह पहले यह बताए कि उसके शासनकाल में ऐसी जमीनों के आवंटन और उपयोग के फैसले कैसे और किन शर्तों पर हुए।