ईडी ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) परीक्षा-2016 ओएमआर हेराफेरी मामले में हरीश रावत के पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के नकद खर्च और संपत्ति की गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसी बेहिसाबी नकदी के स्रोत, उसके इस्तेमाल और संभावित राजनीतिक संबंधों की कड़ियों को खंगाल रही है, जिससे आरोपियों का दायरा बढ़ सकता है।
देहरादून। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) परीक्षा-2016 की ओएमआर हेराफेरी की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब केवल बरामद नकदी और संपत्तियों तक सीमित नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश सिंह रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) चंदन सिंह जीना के आवास से ईडी के हाथ ऐसे प्रमाण भी मिले हैं, जिससे पता चलता है कि बड़े स्तर पर नकद खर्च किया गया है।
बेहिसाबी नकदी के स्रोत और उसके इस्तेमाल की कड़ियां जांच एजेंसी के लिए अहम हो गई हैं। ईडी यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी नकदी जीना तक कैसे पहुंची और बाद में इसका इस्तेमाल किन लोगों के लिए या किन माध्यमों से किया गया।
सूत्रों के अनुसार जांच के केंद्र में यह सवाल भी है कि जीना के यहां मिली नकदी उनकी अपनी अवैध कमाई थी या किसी अन्य व्यक्ति अथवा समूह की रकम उनके पास रखी गई थी। यदि रकम किसी लेनदेन के हिस्से के रूप में मिली थी तो किसने दी, किसके निर्देश पर दी गई और इसके बदले क्या हासिल किया गया, इसकी कड़ी भी खंगाली जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि वीपीडीओ परीक्षा में ओएमआर हेराफेरी के बदले जिस अवैध रकम के लेनदेन की आशंका है, उसमें जीना की क्या भूमिका थी। नकदी को घूस के रूप में प्राप्त किए जाने की आशंका के कोण से भी जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
क्या रकम आकाओं या राजनीतिक संपर्कों तक पहुंची?
जांच का एक संवेदनशील पहलू यह भी है कि जीना के पास मौजूद या उनके माध्यम से चलने वाली नकदी का इस्तेमाल कहीं राजनीतिक गतिविधियों में तो नहीं हुआ। ईडी इस बात की भी पड़ताल कर सकती है कि तौर पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संपर्क तक कोई रकम हिस्सेदारी अथवा अन्य माध्यम से पहुंची थी या नहीं।
इसी क्रम में जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि बरामद या संदिग्ध नकदी का इस्तेमाल चुनावी गतिविधियों में किए जाने की कोई कड़ी बनती है या नहीं।
बड़े बैंक लेनदेन भी जांच के रडार पर
नकदी के साथ-साथ जीना और उनसे जुड़े व्यक्तियों के बैंक खातों में हुए बड़े लेनदेन भी ईडी की जांच का हिस्सा हैं। एजेंसी इन लेनदेन के स्रोत, लाभार्थी और रकम के आवागमन का मिलान कर रही है। इन्हीं वित्तीय कड़ियों के आधार पर कथित अपराध से अर्जित धन को अलग-अलग खातों और लेनदेन के माध्यम से खपाने की आशंका की जांच की जा रही है।
फिलहाल, जीना और उनके परिवार के खातों में कुल 52.16 लाख रुपये के क्रेडिट बैलेंस को ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत फ्रीज किया है। अब बैंक खातों की लेनदेन श्रृंखला, नकद खर्च और अन्य वित्तीय गतिविधियों को आपस में जोड़कर देखा जा रहा है।
आरोपियों का दायरा बढ़ने की संभावना
वीपीडीओ परीक्षा में ओएमआर हेराफेरी से जुड़े तत्कालीन आयोग अधिकारियों, निजी कंप्यूटर एजेंसी और बिचौलियों के बीच रकम के लेनदेन की जांच पहले से चल रही है। अब यदि जीना के वित्तीय लेनदेन से ऐसे नए व्यक्ति सामने आते हैं, जिनका संबंध कथित अवैध रकम के स्रोत, हस्तांतरण या इस्तेमाल से जुड़ता है, तो जांच का दायरा बढ़ सकता है।