उत्तराखण्ड

Big Breaking:-रुड़की अग्निवीर भर्ती की तारीख नजदीक, हजारों अभ्यर्थियों के लिए ठहरने की जगह नहीं, प्रशासन व्यवस्था में जुटा

रुड़की में 5 अक्टूबर से अग्निवीर भर्ती शुरू हो रही है, जिसमें हजारों अभ्यर्थी आएंगे, लेकिन उनके ठहरने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर निर्माण कार्य के कारण समस्या और बढ़ गई है, जिससे अभ्यर्थियों को खुले में रात गुजारनी पड़ सकती है।

रुड़की। शिक्षानगरी के नाम से विख्यात रुड़की में देशभर से विद्यार्थी और अभ्यर्थी पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए पहुंचते हैं। शहर में बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थान हैं।

इसके अलावा बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप (बीईजी) में प्रत्येक तीसरे वर्ष होने वाली अग्निवीर भर्ती में भी बड़ी संख्या में युवा पहुंचते हैं। जिसके चलते भीड रहती हैं लेकिन यहां पर अभ्यर्थियों के ठहरने एवं विश्राम करने की कोई सुविधा नहीं है।

अगले बीस दिन रुड़की शहर की सड़कों पर हजारों अभ्यर्थी कहीं खुले आसमान के नीचे तो कहीं किसी कोने में रात बिताते नजर आएंगे।
रुड़की शहर में पांच अक्टूबर से अग्निवीर की भर्ती होने जा रही है।

एक अनुमान के मुताबिक पूरे प्रदेश से करीब 25 से 30 हजार अभ्यर्थियों, उनके रिश्तेदारों के रुड़की में जुटने की उम्मीद है। हालांकि प्रशासन की ओर से जिलावार भर्ती की गई हैं लेकिन दूर दराज से आने वाले लोग पहले ही पहुंचना शुरू हो जाएंगे।

रुड़की में सबसे बड़ी समस्या इन अभ्यर्थियों के रात गुजारने को लेकर है। दरअसल रुड़की शहर में कहीं पर भी कोई ऐसा स्थान नहीं है जहां पर दो साै ढाई सौ छात्र एक छत के नीचे आ सके। नगर निगम, प्रशासन, कैंट बोर्ड या सेना भी इस ओर कोई स्थायी व्यवस्था आज तक नहीं कर पाई है।

रोडवेज एवं बस अड्डे पर निर्माण के चलते और ज्यादा बढ़ेगी परेशानी

पहले रुड़की स्टेशन एवं बस अड्डे पर बड़ी संख्या में छात्र रुक जाते थे लेकिन अमृत भारत योजना के तहत रुड़की स्टेशन पूरी तरह से टूट चुका है। कोई शेड आदि नहीं है। यहीं हाल यात्री प्रतिक्षालय का भी हैं, जिसकी वजह से स्टेशन पर अब रात्रि ठकराव की कोई व्यवस्था नहीं है। वहीं दूसरी ओर रुड़की बस अड्डे पर भी निर्माण कार्य चल रहा है। इसकी वजह से भी यहां पर भी ठहराव नहीं हो सकता।

छात्रों के लिए धर्मशाला या रैन बसेरे की जरूरत

शहर में यदि छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए कम शुल्क वाला छात्र विश्राम गृह, धर्मशाला अथवा रैन बसेरे जैसी व्यवस्था हो तो समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। ऐसी व्यवस्था में सीमित शुल्क लेकर एक रात ठहरने की सुविधा दी जा सकती है।

इससे बाहर से आने वाले छात्रों और अभ्यर्थियों को न केवल सुरक्षित स्थान मिलेगा, बल्कि उन्हें महंगे होटल का खर्च भी नहीं उठाना पड़ेगा। हालांकि शहर में कुछ धर्मशालाएं हैं लेकिन सभी अब व्यवसायिक हो चली है। शादी विवाह एवं अन्य आयोजन के लिए भी धर्मशालाओं के दरवाजे खुलते हैं।

प्रशासन तैयार करा रहा है हैंगर

रुड़की एसडीएम चौराहे से लेकर बीईजी के गेट तक एक हैंगर को तैयार किया जा रहा है। जिसमें रुकने की व्यवस्था की जाएगी। इसको लेकर सभी तैयारियां चल रही है। सोमवार तक यह बनकर तैयार हो जाएगा। करीब एक हजार अभ्यर्थियों के रुकने की यहां पर व्यवस्था की जा रही है।

यह सही है कि रुड़की शहर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी एवं छात्र आते है। अग्निवीर भर्ती को लेकर प्रशासन की ओर से पूरी तैयारी की जा रही है। लॉज आदि को सख्त हिदायत दी गई है कि अधिक किराया ना वसूल करें, इसके अलावा अन्य व्यवस्था भी की जा रही है।

दीपक रामचंद्र शेट ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की 

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