केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन के बाद लापता हुए ट्रेकरों में से दो और शव बरामद हुए हैं, जिससे मृतकों की संख्या चार हो गई है। इनमें लखनऊ की दो सगी बहनें भी शामिल हैं, जबकि चार ट्रेकर अभी भी लापता हैं और खराब मौसम के कारण सर्च अभियान रुका हुआ है।
उत्तरकाशी। केदारताल ट्रेक पर हिमस्खलन के बाद सात दिन से लापता दो और ट्रेकर के शव बुधवार को मिल गए हैं। अब मृतकों की संख्या चार हो गई है। मृतकों में लखनऊ की दो सगी बहनें भी हैं। दो की अब तक पहचान नहीं हो पाई है। चार ट्रेकर अब भी लापता हैं।
एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की 10 सदस्यीय संयुक्त टीम ने उनकी खोजबीन की, लेकिन दोपहर बाद मौसम के प्रतिकूल होने के चलते सर्च अभियान रोकना पड़ा।
केदारताल में सर्च अभियान में जुटी टीम सुरक्षित
इधर, केदारताल क्षेत्र में लापता ट्रेकर्स की तलाश में जुटी एसडीआरएफ की टीम के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। एसडीआरएफ कंट्रोल रूम, जौलीग्रांट से मिली जानकारी के अनुसार, टीम ने गुरुवार सुबह 8:45 बजे निर्धारित क्षेत्र में सर्च अभियान के लिए प्रस्थान कर दिया है।
चार शवों में से दो की पहचान उत्तर प्रदेश के गायत्रीपुरम, लखनऊ निवासी वर्तिका वर्मा (28) और दीपिका वर्मा (29) के रूप में हुई है। दोनों सगी बहनें थीं। अन्य दो शवों की पहचान के लिए स्जना के पहुंचने का इंतजार है। चारों शव हेलीकॉप्टर से मातली हेलीपैड लाए गए और वहां से पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल पहुंचाए गए।
27 अक्टूबर को 12 सदस्यीय दल गंगोत्री से केदारताल ट्रेक के लिए रवाना हुआ था। इसमें एक स्थानीय गाइड, उत्तर प्रदेश के दो, बंगाल के पांच ट्रेकर, एक कुक और तीन पोर्टर शामिल थे। दल की वापसी 29 अक्टूबर को तय थी, लेकिन मौसम बिगड़ने और भारी बर्फबारी से सदस्य रास्ते में फंस गए।
31 अक्टूबर को बचाव दल ने एक कुक और तीन पोर्टर को सुरक्षित निकाला। स्थानीय गाइड और सात ट्रेकर समेत आठ सदस्य लापता थे। हेलीकॉप्टर से दो बार हवाई रेकी के बाद भी लापता दल का पता नहीं चला। सोमवार को एसडीआरएफ और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की दस सदस्यीय टीम को घटनास्थल पर उतारा गया।
ट्रेकिंग एसोसिएशन की टीम को बर्फ में दबा टेंट मिला, जिसमें राशन, कपड़े, बैग और चप्पलें थीं, लेकिन लोग नहीं मिले। मंगलवार को एक पुरुष और एक महिला ट्रेकर का शव मिला था।



