हल्द्वानी में फर्जी पहचान का उपयोग कर 28 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के प्रयास के मामले में बनभूलपुरा पुलिस अब प्राथमिकी दर्ज करेगी।
हल्द्वानी। निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर कथित तौर पर फर्जी पहचान के जरिये 28 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने के प्रयास के मामले में अब बनभूलपुरा पुलिस प्राथमिकी दर्ज करेगी।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम शुभांगी गुप्ता ने इकराम अली की ओर से दायर प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए पुलिस को शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए हैं। आदेश छह अक्टूबर को जारी किया गया।
इंद्रानगर निवासी इकराम अली का कहना है कि वह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) प्रक्रिया में अपने बूथ पर बीएलए-2 के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्हें 20 अगस्त को जानकारी मिली कि निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर 12 अगस्त को भाग संख्या 134 के 28 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए उनके नाम से फार्म-7 ऑनलाइन भरे गए हैं।
इकराम ने दावा किया कि उन्होंने न तो ये आवेदन किए और न ही किसी दूसरे व्यक्ति को अपनी ओर से आवेदन करने के लिए अधिकृत किया था। आरोप है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पहचान और नाम का दुरुपयोग कर आवेदन प्रस्तुत किए। न्यायालय ने पुलिस से आख्या तलब की थी। पुलिस ने अपनी आख्या में बताया कि इकराम निर्वाचन संबंधी फार्म-7 के मामले में सहायक रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में संशोधन के लिए आपत्ति दर्ज कराने और कथित अपराध की पुलिस जांच अलग-अलग विषय हैं। निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपलब्ध विकल्प आपराधिक विवेचना का स्थान नहीं ले सकता।
न्यायालय ने कहा कि आवेदन भरने में इस्तेमाल की गई उपयोगकर्ता पहचान, लागिन विवरण, पंजीकृत मोबाइल नंबर, ई-मेल, ओटीपी, इंटरनेट पता और उपकरणों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों के आधार पर संबंधित व्यक्तियों की पहचान करना पुलिस विवेचना का विषय है।
न्यायालय ने प्रार्थना पत्र स्वीकार करते हुए बनभूलपुरा थाना प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज कर विधि के अनुसार विवेचना करने और आदेश की प्रति तत्काल भेजने के निर्देश दिए हैं। आरोपों की पुष्टि और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान जांच के बाद ही हो सकेगी।
12 अगस्त को भरे गए थे फार्म-7
शिकायत के अनुसार, निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर 12 अगस्त 2026 को भाग संख्या 134 के 28 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए फार्म-7 भरे गए थे। इकराम अली को इसकी जानकारी 20 अगस्त को मिली। उनका दावा है कि उन्होंने कोई आवेदन नहीं किया था। अब पुलिस जांच में पता लगाया जाएगा कि आवेदन किसने और किन माध्यमों से भरे थे।
थाने से एसएसपी तक भेजी शिकायत
इकराम अली ने 24 अगस्त को स्पीड पोस्ट से बनभूलपुरा थाने और 29 अगस्त को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नैनीताल को शिकायत भेजी थी। डाक अभिलेखों के अनुसार, दोनों शिकायतें संबंधित कार्यालयों में पहुंच गई थीं। इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उन्होंने 15 सितंबर को न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। छह अक्टूबर को न्यायालय ने उनका प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों से होगी पहचान
मामले में आवेदन भरने के लिए इस्तेमाल किए गए लॉगिन विवरण, पंजीकृत मोबाइल नंबर, ई-मेल, ओटीपी, इंटरनेट पता और उपकरणों से संबंधित अभिलेख अहम हो सकते हैं। न्यायालय के अनुसार, इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों की पहचान करना पुलिस विवेचना का विषय है। जांच में संबंधित अभिलेख जुटाकर आवेदन प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों का पता लगाने का प्रयास किया जाएगा।
मतदाता सूची में आपत्ति का विकल्प अलग
पुलिस ने अपनी आख्या में कहा था कि इकराम अली एसआइआर से संबंधित फार्म-7 के मामले में सहायक रिटर्निंग अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। हालांकि, न्यायालय ने माना कि मतदाता सूची में संशोधन और कथित फर्जी पहचान के मामले में आपराधिक जांच अलग-अलग विषय हैं। इसी आधार पर न्यायालय ने प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने के निर्देश दिए।



