बदरीनाथ में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में सेना के सिग्नल कोर ने अहम भूमिका निभाई। उनकी समय पर मिली जानकारी और घटनास्थल के पास मौजूदगी ने बचाव अभियान को सफल बनाया, जिससे लापता हेलीकॉप्टर को ढूंढने में लगने वाला समय बच गया।
गोपेश्वर। बदरीनाथ से देहरादून जा रहा ट्रांस भारत कंपनी के दुर्घटनाग्रस्त हैलीकाप्टर को लेकर सेना की सिंग्नल कोर के कैंप में मौजूद जवान व अधिकारी दुर्घटना को लेकर प्रत्यक्षदर्शी साबित होने के साथ रैस्क्यू के असली मददगार साबित हुए हैं।
दुर्घटना से लेकर रैस्क्यू के साथ सूचनाओं का तत्काल आदान प्रदान कर सेना ने इस रैस्क्यू आपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, अन्यथा इस दुर्घटना को लेकर खोजबीन में ही रैस्क्यू टीमों को पसीना बहाना पड़ता।
दोपहर एक बजकर 12 मिनट पर दुर्घटनाग्रस्त हैलीकाप्टर देहरादून के लिए रवाना हुआ था। कुछ ही मिनट पर वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हैलीकाप्टर के लापता होने की सूचना देहरादून को तब मिली जब इस हैली से पहले एक बजकर पांच मिनट पर बदरीनाथ धाम से देहरादून को गया हैली व एक बजकर 20 मिनट पर दुर्घटनाग्रस्त हैली के बाद उड़ान भरने वाला हैली शहस्त्रधारा हैलीपैड पहुंचा।
फिर इसके लापता होने की जानकारी मिली। हालांकि इससे पहले दुर्घटनास्थल के 100 मीटर हवाई रेंज में मौजूद सेना सिंग्नल कोर के टुकड़ी ने दुर्घटना की सूचना सेना मुख्यालय ज्योतिर्मठ को दे दी थी।
बताया गया कि दुर्घटना के दौरान की फोटो, बीडियो भी सेना के जवानों ने ही बनाई , तथा दुर्घटना के एक घंटे बाद सेना के लगभग जवान अधिकारी मौके पर पहुंच कर रैस्क्यू में जुट गए थे। बताया गया कि मौके पर आने के लिए देरी इसलिए हुई क्यों कि पहाड़ी मे जाने का रास्ता घूम कर आने का था।
सेना ने मौके पर सभी शवों को एकत्रित कर सुरक्षित रखा है। बताया गया कि शव बुरी तरह जल चुके हैं। बताया गया कि दुर्घटनाग्रस्त हैलीकाप्टर पहले पहाड़ी पर टकराया, फिर पलटा खाकर निचे गिरा, और आग लगने के बाद बिखर गया। बताया गया कि घटनास्थल पर 10 से अधिक जवान अधिकारी मौजूद थे।



