
डीएवी पीजी कॉलेज देहरादून के छात्रसंघ समारोह में विवाद हो गया। हरियाणवी गीतों पर लेडी डांसरों की प्रस्तुति और गायक मासूम शर्मा द्वारा कथित आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग ने हंगामा खड़ा कर दिया।
देहरादून। डीएवी पीजी कालेज उत्तराखंड में केवल एक महाविद्यालय नहीं, बल्कि छात्र राजनीति, वैचारिक नेतृत्व, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक परंपरा की मजबूत पाठशाला माना जाता है।
दशकों से यह संस्थान प्रदेश के बौद्धिक और राजनीतिक जीवन को दिशा देता रहा है। इसी परिसर से कई कैबिनेट मंत्री, विधायक, पूर्व महापौर, वर्तमानमहापौर और कई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़े।
अपनी समृद्ध शैक्षणिक परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचान रखने वाले इसी संस्थान में शनिवार को छात्रसंघ समारोह के दौरान सामने आए दृश्य ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
हरियाणवी गीतों की तेज धुनों पर धमाल
सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर हरियाणवी गीतों की तेज धुनों पर लेडी डांसरों की प्रस्तुति हुई। मंच के सामने बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं देर तक झूमते रहे। जिस परिसर में वर्षों तक वाद-विवाद, साहित्यिक आयोजन, वैचारिक संवाद और शैक्षणिक गरिमा छात्र जीवन की पहचान रहे हों, वहां मंच का बदला हुआ स्वरूप कई लोगों को असहज करता दिखाई दिया।
विवाद तब और गहरा गया जब हरियाणवी गायक मासूम शर्मा ने मंच से कथित आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया। देवभूमि के शैक्षणिक मंच से ऐसी भाषा सुनते ही मौके पर मौजूद लोगों के बीच नाराजगी उभरी।
कई लोगों ने इसे केवल मंचीय असावधानी नहीं, बल्कि शिक्षा के मंदिर की गरिमा के प्रतिकूल बताया। सवाल उठने लगे कि जिस राज्य की पहचान सांस्कृतिक शालीनता, संयम और मर्यादा से जुड़ी हो, वहां इस प्रकार की प्रस्तुति किस दिशा का संकेत देती है।
मुख्यधारा की राजनीति का गढ़ रहा है डीएवी
डीएवी कालेज की छात्रसंघ राजनीति हमेशा मुख्यधारा की राजनीति की प्रयोगशाला रही है। यहां से निकले छात्र आगे चलकर सरकार, विधानसभा, नगर निकाय व सार्वजनिक जीवन के महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचे। यही कारण है कि इस परिसर में होने वाले आयोजनों को सामान्य सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्र नेतृत्व के संस्कारों से जोड़कर देखा जाता है।
मर्यादा पर बहस का कारण बना समारोह
समारोह के दौरान सामने आए दृश्य केवल मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि बदलते छात्र राजनीतिक संस्कार, शैक्षणिक आयोजनों की दिशा व सांस्कृतिक मर्यादा पर व्यापक बहस का कारण बन गए। देवभूमि के आंगन में इस तरह की प्रस्तुति ने यह प्रश्न और तीखा कर दिया है कि क्या अब शैक्षणिक परिसरों में सांस्कृतिक आयोजनों की सीमाएं और मर्यादाएं नये सिरे से तय करने की जरूरत है।
उत्तराखंड की लोक संस्कृति देव परंपरा पर आधारित है, इसलिए यहां आचरण में भी मर्यादा और सम्मान दिखाई देता है। अतिथि देवो भव: की भावना हमारी पहचान है। ऐसे में मंच से हुई इस तरह की भाषा निंदनीय है। कलाकार की भाषा में गरिमा होनी चाहिए। – चंद्रशेखर जोशी, सचिव, पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति
उत्तराखंड की जनता देवतुल्य है और शैक्षणिक संस्थानों के छात्र सरस्वती के उपासक माने जाते हैं। ऐसे मंच से गाली-गलौज करना सरस्वती का अपमान है। कलाकार के चयन में आयोजकों को भी गंभीरता रखनी चाहिए थी।
-मंगलेश डंगवाल, लोकगायक
ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए थी। उत्तराखंड की संस्कृति अलग है और उसका सम्मान जरूरी है। मंच से अपशब्द बोले जाने पर हमने तुरंत विरोध किया, कार्यक्रम रुकवाया और कलाकार को वापस भेज दिया। यदि पहले से प्रस्तुति की प्रकृति पता होती तो उन्हें आमंत्रित ही नहीं किया जाता।
-प्रो. कौशल कुमार, प्राचार्य, डीएवी पीजी कालेज
कोई भी आयोजन हो उसमें अपशब्द नहीं होने चाहिए। कार्यक्रम के बाद गायक मासूम शर्मा के मैनेजर से बात हुई, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने इस घटना पर इंटरनेट मीडिया पर माफी मांग ली है।
-ऋषभ मल्होत्रा, छात्रसंघ अध्यक्ष, डीएवी









