Big Breaking:-हरिद्वार में बढ़ा अपराध: बात-बात पर हो रही हत्याएं, देहात से ज्यादा शहर हिंसक

हरिद्वार शहर देहात से अधिक हिंसक हो गया है, पिछले डेढ़ महीने में छह हत्याएं हुई हैं, जिनमें से अधिकांश नशे या मामूली विवादों के कारण हुई हैं।

हरिद्वार। खूनी संघर्ष व हत्या जैसी जघन्य घटनाओं के लिए अभी तक जनपद का देहात क्षेत्र बदनाम था। लेकिन अब शहरी क्षेत्र देहात से ज्यादा हिंसक नजर आ रहा है। पिछले डेढ़ महीने के भीतर हत्या की छह घटनाएं इसकी गवाही दे रही हैं।

खास बात यह है कि देहात में ऐसी घटनाएं जमीन-जायदाद की रंजिश के कारण होती आई हैं, मगर शहर में एक भी घटना में ऐसी कोई रंजिश या विवाद निकलकर सामने नहीं आई है।

अधिकांश घटनाएं नशे के कारण या फिर मामूली बात पर क्षणिक आवेश में हुई हैं। हत्या के साथ ही खूनी संघर्ष की घटनाओं में भी इजाफा दर्ज किया जा रहा है। हालां, सभी घटनाओं में पुलिस ने आरोपितों को कुछ घंटों के भीतर गिरफ्तार किया,

मगर बात-बात पर कत्ल होना किसी भी नजरिये से अच्छा संकेत नहीं है। हत्या और खूनी संघर्ष की यह घटनाएं न सिर्फ पुलिस के लिए चिंता का कारण बन रही हैं, बल्कि धर्मनगरी की छवि को भी नुकसान पहुंचा रही हैं।

दो फक्कड़ और एक नशेड़ी की हत्या

धर्मनगरी में हत्या की ज्यादातर घटनाएं समाज के निम्न वर्गीय तबके में हुई हैं। शहर कोतवाली क्षेत्र में करीब डेढ़ महीने पहले मायापुर पार्किंग में एक नशेड़ी ने कूड़ा बीनने वाले व्यक्ति को पत्थर से कूचकर हत्या कर डाली।

गनीमत रही कि प्रत्यक्षदर्शियों ने उसे देख लिया और सूचना पर पुलिस ने आरोपित को धर लिया। इसके बाद उत्तरी हरिद्वार में एक फक्कड़ साधु को दो नशेड़ी युवकों ने रुपयों के लालच में मौत के घाट उतार दिया।

एक सप्ताह पहले दीनदयाल पार्किंग के पास नेपाल मूल के एक युवक ने एक और फक्कड़ बाबा की हत्या कर डाली। इन तीनों घटनाओं में मरने वाले के परिवारों का कुछ अता-पता नहीं था। इसलिए ज्यादा शोर-शराबा नहीं हुआ। जबकि चौथी घटना में चार दिन पहले निर्मला छावनी में पड़ोसियों के बीच हुए खूनी संघर्ष में एक युवक की मौत हो गई।

विवाद मामूली गाली-गलौच से शुरू हुआ था। बिल्कुल ताजा मामला दो दिन पहले बहादराबाद के बौंगला क्षेत्र में सामने आया है। जहां धामपुर बिजनौर निवासी एक फैक्ट्री कर्मचारी के सिर पर हथौड़े से हमला कर हत्या कर दी गई।

युवाओं के गुट भी बन रहे कारण

शहरी क्षेत्र में नव-युवाओं के गुटों में वर्चस्व की जंग भी खूनी संघर्ष व हत्या का कारण बन रही है। कुछ महीने पहले ही कनखल क्षेत्र में दो युवकों की हत्या कर दी गई। जिनमें पहली घटना जमालपुर क्षेत्र में हुई। जबकि दूसरी घटना में बहन को गलत नजर से देखने पर नाबालिग को उसके दोस्त ने ही पत्थर से कूचकर मार डाला।

जबकि युवाओं के बीच खूनी संघर्ष की घटनाओं पर गौर करें तो पिछले चार महीने 10 से ज्यादा घटनाएं हुई हैं। जिनमें छह घटनाओं में गोली भी चली है। एक और चिंताजनक बात यह है कि खूनी संघर्ष की लगभग हर घटना में एक-दो आरोपित नाबालिग रहे हैं।

इंटरनेट मीडिया और वेबसीरिज जिम्मेदार

शहरी क्षेत्र में हत्या व खूनी संघर्ष की घटनाओं पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। रिटायर्ड पुलिस उपाधीक्षक जेपी जुयाल मानते हैं कि युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति और इंटरनेट मीडिया का बढ़ता प्रभाव इसके लिए जिम्मेदार है। कम उम्र में ही नशे का आदी होने पर युवा अपने रास्ते से भटक रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर हथियारों के साथ रील बनाने का शौक उन्हें अपराधी बना रहा है।

वहीं, मनोवैज्ञानिक डा. दीपेश चंद्र प्रसाद इसके लिए हिंसक वेबसीरिज को सबसे ज्यादा जिम्मेदार मानते हैं। उनका कहना है कि वेबसीरिज और नई आने वाली फिल्मों में न सिर्फ हत्या की घटनाएं ज्यादा दिखाई जा रही हैं, बल्कि हत्या में जघन्यतम तरीके दिखाए जा रहे हैं। उनक असर युवाओं के मन मस्तिष्क पर तेजी से हो रहा है।

संगठित अपराध को रोकने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क व सजग है। लेकिन अधिकांश हत्या व खूनी संघर्ष की घटनाएं पेशेवर अपराधियों के बजाय आम नागरिकों में देखने को मिल रही हैं। जहां तक युवाओं के गुटों में वर्चस्व की लड़ाई की बात है, इस दिशा में गंभीरता से कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। – नवनीत सिंह, एसएसपी हरिद्वार

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