
देहरादून में गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड के फरार छह आरोपियों पर इनामी राशि 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है। पुलिस ने आरोपियों की तस्वीरें जारी की हैं और जनता से सूचना देने की अपील की है।
देहरादून। झारखंड के गैंगस्टर विक्रम शर्मा हत्याकांड के तीन शूटरों सहित छह पर पुलिस ने इनामी राशि बढ़ा दी है। एसएसपी की ओर से पहले इनामी राशि 25-25 हजार रुपये जारी की थी, लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद भी बदमाश फरार हैं, ऐसे में बदमाशों पर इनामी राशि 50-50 हजार की गई है।
इसके साथ ही लगातार पुलिस ने फरार चल रहे बदमाशों की फोटो जारी किए हैं। आमजन से अपील की गई है कि यदि बदमाशों के बारे में कोई सूचना हो तो तत्काल सिटी कंट्रोल रूम देहरादून के नंबर 9411112972 पर संपर्क कर सकते हैं।
13 फरवरी की सुबह राजपुर रोड स्थित सिल्वर सिटी माल से बाहर निकल रहे गैंगस्टर विक्रम शर्मा की शूटरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके बाद शूटर फरार हो गए। इस मामले में दून पुलिस ने हत्याकांड में सहयोगी रहे दो बदमाशों अक्षत ठाकुर व राजकुमार को पुलिस व एसटीएफ की संयुक्त टीम ने गिरफ्तार कर लिया है,
जबकि तीन शूटर समेत छह आरोपित अभी फरार हैं। गिरफ्तार अक्षत नोएडा में एक निजी कालेज में बीबीए का छात्र है, जबकि राजकुमार फरार बदमाश यशराज का पिता है और वारदात में खुद भी शामिल था।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस सनसनीखेज हत्या की साजिश करीब छह महीने पहले जमशेदपुर जेल के भीतर रची गई थी। योजना के तहत शूटर देहरादून पहुंचे थे। यहां उन्हें ठहरने, लोकेशन तय करने,
वाहन उपलब्ध कराने और भुगतान कराने तक पूरी मदद स्थानीय नेटवर्क ने की और वारदात के तुरंत बाद सभी फरार हो गए। गिरफ्तार आरोपित अक्षत ठाकुर निवासी जुगसलाई, जमशेदपुर और राजकुमार निवासी बागबेड़ा, जमशेदपुर (झारखंड) ने शूटरों को लाजिस्टिक मदद दी थी।
वहीं, फरार चल रहे आरोपितों में अंकित वर्मा निवासी थाना रोड टंगरा टोली, लोहरदगा जमशेदपुर, आशुतोष कुमार निवासी जुगसलाई जमशेदपुर, विशाल सिंह निवासी गाराबासा, बागबेड़ा जमशेदपुर, आकाश कुमार प्रसाद निवासी बागबेरा, जमशेदपुर जुगसलाई, यशराज निवासी सिंहभूम और जितेंद्र कुमार साहू निवासी मांगो पूर्वी सिंहभूम, झारखंड शामिल हैं।
विक्रम शर्मा के विरुद्ध कई मुकदमे थे दर्ज
विक्रम शर्मा झारखंड का कुख्यात अपराधी था और हत्या, हत्या के प्रयास तथा रंगदारी जैसे कई मामलों में वांछित था। आठ वर्ष पहले जमशेदपुर पुलिस ने उसे देहरादून से गिरफ्तार किया था। विक्रम शर्मा की हत्या किसी तात्कालिक रंजिश का नतीजा नहीं,
बल्कि शूटर आशुतोष की ओर से रची गई साजिश थी। आशुतोष को अच्छी तरह पता था कि विक्रम से सीधे टकराना आसान नहीं। इसलिए उसने ऐसे लोगों को गिरोह में शामिल किया, जो खुद विक्रम के जुल्म और दबाव का दर्द झेल चुके थे।








