देहरादून में निर्माणाधीन ग्रीन बिल्डिंग में भुगतान न मिलने से नाराज एक पेटी ठेकेदार टावर क्रेन पर चढ़ गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
देहरादून। सरकार की अति महत्वकांक्षी ग्रीन बिल्डिंग परियोजना एक बार फिर विवादों में आ आई है। वित्तीय लेनदेन के विवाद में बुधवार शाम को एक पेटी ठेकेदार टावर क्रेन पर चढ़ गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर लक्खीबाग से पुलिस पहुंची। हालांकि ठेका कंपनी व पेटी ठेकेदार के बीच बातचीत होने पर वह नीचे उतर आए।
बुधवार शाम को पुलिस को सूचना मिली कि निर्माणाधीन ग्रीन बिल्डिंग में एक व्यक्ति टावर क्रेन पर चढ़ गया गया है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। तब तक ठेकेदार नीचे उतर आया था। बताया जा रहा है कि ठेका कंपनी की ओर से पेटी ठेकेदार को लंबे समय से भुगतान नहीं किया गया है, जिसके कारण वह परेशान थे।
ऐसे में वह टावर क्रेन पर चढ़ गए। ठेका कंपनी ने भुगतान के लिए 10 दिन का समय मांगा है। चौकी प्रभारी राकेश पुंडीर ने बताया कि एक व्यक्ति के टावर क्रेन पर चढ़ने की सूचना मिली थी, जब तक पुलिस मौके पर पहुंची तक वह नीचे उतर आए थे। अभी तक किसी भी पक्ष से कोई शिकायत नहीं मिली है।
विवादों में चल रहा है प्रोजेक्ट
जिले के सभी प्रमुख कार्यालयों को एक छत के नीचे लाने और पार्किंग की अतिरिक्त सुविधा देने के लिए सरकार की ओर से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत देहरादून में ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। राजधानी में यह ऐसी बिल्डिंग है, जहां करीब 75 दफ्तर एक ही छत के नीचे होंगे और 1000 से 1200 कारें पार्क की जा सकेंगी।
ग्रीन बिल्डिंग कार्य कार्यदायी संस्था केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की देखरेख में हो रहा है और 206 करोड़ के बजट से तैयार होने वाली ग्रीन बिल्डिंग का निर्माण पिछले ढाई साल से चल रहा है, जोकि अक्टूबर 2025 तक तैयार होनी थी। काम की रफ्तार बेहद धीमी होने के चलते एक बार और समयसीमा बढ़ाई गई है, जोकि सितंबर 2026 में समाप्त हो रही है।
पेटी ठेकेदार को भुगतान न करने पर धीमी पड़ी काम की चाल
ठेका कंपनी कश्यपी इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से पेटी ठेकेदार को समय से भुगतान न करने के कारण प्रोजेक्ट की गति धीमी पड़ी है। इससे पहले बिल्डिंग निर्माण का काम देख रहे कुलदीप सेठी, गगन गोयल के साथ ठेका कंपनी का विवाद हुआ था। पेटी ठेकेदार कुलदीप सेठी, गगन गोयल का छह करोड़ रुपये का भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। ऐसे में उन्होंने काम से हाथ खड़े कर दिए, जिसके कारण प्रोजेक्ट की रफ्तार बेहद धीमी हो गई।
परियोजना पर एक नजर
- निर्माण क्षेत्रफल छह हजार वर्गमीटर
- भूखंड क्षेत्रफल 19 हजार वर्गमीटर
- 1000 से 1200 वाहनों की पार्किंग क्षमता
- 100 किलो लीटर डेली क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
- 500 व्यक्तियों की क्षमता का सेमीनार हाल
- बिल्डिंग ऊर्जा दक्ष होगी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग के पुख्ता इंतजाम होंगे