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Big Breaking:-उत्तराखंड में सबसे तेजी से बढ़ी बेटियों की चाहत, जन्म के समय लिंगानुपात सुधार में राज्य अव्वल

उत्तराखंड जन्म के समय लिंगानुपात सुधार में देश में पहले स्थान पर रहा है, जिसमें 11 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह सुधार जागरूकता अभियानों, स्वास्थ्य सेवाओं और पीसीपीएनडीटी एक्ट के सख्त पालन का परिणाम है।

देहरादून। उत्तराखंड के पहाड़ों में बेटियों की चाहत सबसे तेजी से बढ़ी है। सोच में आए बदलाव का असर जन्म के समय लिंगानुपात पर भी दिखाई दे रहा है।

लिंगानुपात सुधार में उत्तराखंड ने सबसे बेहतर प्रदर्शन कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य में जन्म लिंगानुपात में 11 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो सभी बड़े राज्यों में सबसे अधिक है।

लिंगानुपात सुधार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ताजा सैंपल रजिस्ट्रेशन रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020-22 में उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात 857 था, जो अब बढ़कर 868 हो गया है, हालांकि राज्य का आंकड़ा अभी भी कम है, लेकिन सुधार की रफ्तार प्रदेश में सबसे तेज रही है।

उत्तराखंड के बाद तमिलनाडु और तेलंगाना में 9-9 अंकों का सुधार दर्ज किया गया, जबकि दिल्ली और पंजाब में 8-8 अंकों की बढ़ोतरी हुई है। जन्म के समय लिंगानुपात में तेजी से आया सुधार बताता है कि प्रत्येक 1000 लड़कों पर कितनी लड़कियां जन्म ले रही हैं। इसमें सुधार का मतलब केवल आंकड़ों से नहीं बल्कि समाज की सोच से है।

प्रदेश सरकार की प्राथमिकता, जागरूकता अभियान,स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच और बेटी बचाओ जैसे अभियानों में गति के कारण उत्तराखंड में तेजी से जन्म लिंगानुपात में बदलाव आया है। बेटियों को लेकर समाज में सकारात्मक सोच विकसित हो चुकी है। आने वाले समय में राज्य का लिंगानुपात और बेहतर हो, इसके लिए निरंतर प्रयास जारी रहेंगे।’ -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

2022 के बाद बदली असली तस्वीर

वर्ष 2014-16 से तुलना करें तो उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात 850 से बढ़कर 868 तक पहुंच गया है, यानी कुल 18 अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

दिलचस्प यह है कि 2014-16 से 2020-22 तक करीब छह वर्षों में लिंगानुपात में केवल सात अंकों का सुधार हुआ, जबकि 2020-22 के बाद के बाद ही 11 अंकों की बड़ी छलांग देखने को मिली। यह दर्शाता है कि हाल के कुछ वर्षों में राज्य में बेटियों को लेकर सोच, जागरूकता व सरकार के प्रयासों में तेजी से बदलाव आया है।

राज्यों की तस्वीर

वर्ष 2022 के बाद राज्य के लिंगानुपात में वृद्धि

  • उत्तराखंड, 11
  • तमिलनाडु, 09
  • तेलंगाना, 09
  • दिल्ली, 08
  • पंजाब, 08
  • आंध्र प्रदेश, 07
  • महाराष्ट्र, 06
  • हिमाचल प्रदेश, 05
  • छत्तीसगढ़, 04
  • ओडिशा, 04
  • असम, 03
  • गुजरात, 03
  • उत्तर प्रदेश, 03

अल्ट्रासाउंड सेंटर्स पर सख्ती से टूटी लिंग जांच की कमर

उत्तराखंड में कन्या भ्रूण हत्या और लिंग जांच पर सख्ती से लगी रोक ने भी लिंगानुपात को बढ़ाने में मदद की। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत स्वास्थ्य विभाग ने लगातार सख्त रुख अपनाया। समय-समय पर की गई जांच और औचक निरीक्षणों के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले कई अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की गई।

कुछ मामलों में मशीनें सील की गईं, तो कुछ केंद्रों के पंजीकरण रद्द कर दिए गए। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि राज्य में लिंग जांच पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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