
देहरादून में बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर पुलिस ने शिकंजा कसा है, उसकी महिंद्रा थार कार जब्त कर 12 घंटे पूछताछ की गई।
देहरादून। एटीएस हेवेनली फूटहिल्स में लंबे समय से दहशत और दबंगई का पर्याय बने बिल्डर पुनीत अग्रवाल पर अब कार्रवाई का घेरा कसता दिख रहा है।
कालोनी में मारपीट, धमकी, तेज रफ्तार वाहन चलाकर भय पैदा करने और हालिया विज्ञानी से मारपीट प्रकरण के बाद पुलिस ने रविवार रात उसकी महिंद्रा थार कार सीज कर दी।
इसके साथ ही करीब 12 घंटे तक पूछताछ कर पुराने मामलों की फाइलें भी फिर से खंगालनी शुरू कर दी गई हैं।
पुलिस अब उन मुकदमों की भी जांच करेगी, जिनमें पहले फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लग चुकी है। सवाल यह है कि लगातार शिकायतों और विवादों के बावजूद कई मामलों में आखिर प्रकरण किस आधार पर बंद किए गए।
सूत्रों के अनुसार, पुराने मुकदमों की विवेचना, शिकायतों की प्रकृति व उस समय की पुलिस कार्रवाई का रिकार्ड निकाला जा रहा है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेन्द्र डोबाल ने बताया कि कालोनीवासियों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बिल्डर तेज रफ्तार से वाहन चलाकर लोगों को डराता है और विवाद का माहौल बनाता है। इसी आधार पर वाहन सीज किया गया।
गुंडा एक्ट के बाद बढ़ा दबाव
डीआरडीओ विज्ञानी से मारपीट के ताजा मामले के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने बिल्डर को गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है।
पांच मई को उसे अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं मिला तो जिला बदर की कार्रवाई भी हो सकती है।
2021 से कालोनी में विवादों का सिलसिला
कालोनीवासियों के अनुसार वर्ष 2021 से बिल्डर के खिलाफ लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। अब तक उसके खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।
इसके बावजूद कालोनी में उसका व्यवहार लगातार विवादों का कारण बना रहा। हालिया विवाद में डीआरडीओ की डिफेंस इलेक्ट्रानिक्स एप्लीकेशन लैबोरेटरी (डील) के विज्ञानी अनिरुद्ध शर्मा के साथ कथित मारपीट हुई।
आरोप है कि पहले उनके माता-पिता से अभद्रता की गई, फिर विरोध करने पर विज्ञानी को अपने परिसर में बुलाकर हमला किया गया। इस घटना में उनके कान के पर्दे को गंभीर चोट पहुंची।
सीसीटीवी फुटेज पर भी सवाल
घटना के बाद रायपुर थाना पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों में है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पूरी घटना सीसीटीवी में कैद है, लेकिन पुलिस अब तक मूल फुटेज कब्जे में नहीं ले सकी। आरोप है कि चयनित फुटेज इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित की जा रही है, जिससे जांच की दिशा प्रभावित हो सकती है।
अब संपत्ति और नेटवर्क की भी जांच
सूत्रों के अनुसार पुलिस और जिला प्रशासन बिल्डर की संपत्ति, पुराने विवाद, कारोबारी गतिविधियों और कालोनी में प्रभाव के दायरे की भी जांच कर रहे हैं। कुछ विवेचनाओं को दूसरे थानों में स्थानांतरित करने पर भी विचार किया जा रहा है।









