
पौड़ी जनपद में देवप्रयाग-पौड़ी मोटर मार्ग पर कुंडाधार के पास एक कार खाई में गिर गई, जिसमें एक ही परिवार के छह लोग सवार थे। इस हादसे में कार चालक की मौत हो गई और पांच अन्य घायल हो गए।
पौड़ी। जनपद पौड़ी में देवप्रयाग-पौड़ी मोटर मार्ग पर कुंडाधार के समीप एक कार अनियंत्रित होकर खाई में गिर गई। कार में एक ही परिवार के छह लोग सवार थे।
हादसे में कार चालक की मौत हो गई है, जबकि पांच लोग घायल हैं। इनमें चार घायलों का उपचार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी देवप्रयाग में चल रहा है, जबकि एक घायल को बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर किया है।
जनपद पौड़ी के थाना बाह बाजार देवप्रयाग के थानाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि जिले के ग्राम कफलना (पौड़ी) के एक परिवार के छह लोग मां चंद्रबदनी मंदिर में दर्शन-पूजा कर घर वापस लौट रहे थे।
रविवार को दोपहर करीब सवा तीन बजे देवप्रयाग-पौड़ी मोटर मार्ग पर कुंडाधार से लगभग एक किलोमीटर पहले वाहन चालक नियंत्रण खो बैठा और कार खाई में जा गिरी।
उन्होंने बताया कि हादसे में लक्ष्मण सिंह रावत (62) पुत्र कुंदन सिंह को गंभीर चोटें आई थी। जिन्हें रेस्क्यू कर सीएचसी बागी भेजा गया था। जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया है।
वाहन भी वह स्वयं ही चला रहे थे। बताया कि हादसे के पांच घायलों में जगदीश सिंह रावत, मनोरमा देवी, हेमंत रावत, साक्षी और देवेश शामिल हैं।
जिनमें मनोरमा देवी को सीएचसी बागी से बेस अस्पताल श्रीनगर रेफर कर दिया गया है, जबकि चार घायलों की हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। सभी घायलों को खाई से निकालकर उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बागी देवप्रयाग में भर्ती कराया गया है।
थानाध्यक्ष अमरजीत सिंह रावत ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पांच दिन पहले हुई थी बेटे की शादी
कफलना गांव निवासी मृतक लक्ष्मण सिंह के बेटे हेमंत रावत की शादी बीते 21 अप्रैल को हुई थी। शादी के बाद पूरा परिवार बेटे बहू सहित मां चंद्रबदनी के दर्शन के लिए गया था।
वाहन में लक्ष्मण सिंह रावत, उनकी पत्नी मनोरमा देवी, बेटा हेमंत रावत, बहू साक्षी, भाई जगदीश रावत कार में सवार थे।
ग्रामीण करन रावत ने बताया कि लक्ष्मण सिंह रावत पूर्व सैनिक थे। बीते 21 अप्रैल को उनके बेटे हेमंत की शादी हुई थी। परिवार मां चंद्रबदनी का आशीर्वाद लेने गया था।









