
दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण ने नया मोड़ ले लिया है। एक एमबीबीएस छात्र ने सीनियर छात्रों के साथ कुछ फैकल्टी सदस्यों पर भी अनुचित दबाव और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है।
देहरादून। दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग प्रकरण में अब नया मोड़ आ गया है। एक ओर जहां रैगिंग से जुड़े आरोप सामने आए हैं।
वहीं दूसरी ओर कुछ फैकल्टी सदस्यों पर भी अनुशासन के नाम पर दबाव बनाने और कथित अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए गए हैं। पूरे मामले ने संस्थान में हलचल बढ़ा दी है और कॉलेज प्रशासन ने इस मामले में जांच कमेटी गठित कर दी है।
शिकायतकर्ता छात्र को कॉलेज प्रशासन ने बताया लापता
रैगिंग से जुड़े आरोपों के केंद्र में 2025 बैच का एक एमबीबीएस छात्र है। जिसने सीनियर छात्रों पर दाढ़ी कटवाने का दबाव बनाने और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली स्थिति यह है कि शिकायत दर्ज कराने वाला छात्र अब तक सामने नहीं आया है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार शिकायतकर्ता ने स्वयं को 2025 बैच का छात्र बताया गया है, लेकिन न तो उसकी पहचान की पुष्टि हो पाई है और न ही वह जांच कमेटी के संपर्क में आया है। प्रशासन ने बताया कि कई प्रयासों के बावजूद छात्र का कोई पता नहीं चल सका है, जिसके चलते उसकी स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
यही कारण है कि मामले की जांच में भी शुरुआती स्तर पर बाधाएं आ रही हैं। प्रबंधन का कहना है कि यदि छात्र सामने आता है तो जांच प्रक्रिया को और स्पष्ट दिशा मिल सकेगी। फिलहाल इस प्रकरण को रैगिंग से जुड़े संभावित मामले के रूप में जांचा जा रहा है।
फैकल्टी पर भी गंभीर आरोप, अलग जांच जारी
छात्र की शिकायत में कुछ फैकल्टी सदस्यों पर भी आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कुछ शिक्षकों द्वारा छात्रों पर अनुशासन के नाम पर अनुचित दबाव बनाया गया और व्यवहार को लेकर सख्ती की गई।
इस पर कॉलेज की प्राचार्य डा. गीता जैन ने वीडियो बयान जारी करते हुए कहा कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जो सभी पहलुओं, छात्रों और फैकल्टी दोनों की अलग-अलग जांच कर रही है।
प्राचार्य का तर्क है कि प्रारंभिक तौर पर यह मामला पूरी तरह रैगिंग की परिभाषा में स्पष्ट रूप से फिट होता दिखाई नहीं देता, बल्कि यह अनुशासन और शैक्षणिक माहौल से जुड़े विवाद जैसा भी प्रतीत हो रहा है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच जरूरी है।
प्रशासन सख्त, रिपोर्ट का इंतजार
कॉलेज प्रशासन ने साफ किया है कि संस्थान में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, दबाव या उत्पीड़न को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे आरोप छात्रों पर हों या फैकल्टी पर। जांच कमेटी को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और प्रशासन की नजर कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे किस तरह की कार्रवाई की जाएगी।









