ब्रिटेन में कैद कैप्टन अजय पंत के परिवार में सन्नाटा पसरा है, उनकी मासूम बेटियां अपने पिता का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
रामनगर। ब्रिटेन में कैद चिल्किया गांव निवासी कैप्टन अजय पंत के घर में इस समय सिर्फ सन्नाटा है। कुछ दिन पूर्व जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंज रही थी, वहां अब सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है कि पापा कब आएंगे।
अजय की मां दीपा पंत ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले ही अजय ने वीडियो काल पर अपनी मासूम बेटियों से बात की थी। उन्होंने वादा किया था कि वह जल्द ही क्रूड आयल लेकर गुजरात बंदरगाह पहुचंगे और फिर पत्नी व बेटियों को अपने पास मिलने के लिए बुला लेंगे।
16 जुलाई को ब्रिटिश कोर्ट में मामले की होनी है सुनवाई
23 अप्रैल को छुट्टी बीताकर घर से डयूटी पर निकलते समय किसी ने सोचा नहीं था कि ऐसा समय भी देखना पड़ेगा। अजय की दो मासूम बिटियां, जिन्हें दुनियां की बंदिशों और अदालत का मतलब नहीं पता, हर पल सिर्फ अपने पापा की चिंता कर रही है। 16 जुलाई को ब्रिटिश कोर्ट में मामले की सुनवाई होनी है, तब तक के लिए परिवार का हर एक दिन, हर ढलता सूरज किसी पहाड़ जैसा भारी पड़ रहा है।
हर दिन सुबह होते ही माता-पिता व पत्नी को अजय की चिंता होने लगती है। माता-पिता व पत्नी के लिए यह किसी कठिन समय से कम नहीं है। लोग उन्हें हौंसला दे रहे हैं, लेकिन हर रोज बेटे की चिंता होना स्वभाविक है। बूढ़े माता-पिता की बेबस आंखें अब सिर्फ भारत सरकार की तरफ टकटकी लगाए बैठी हैं। उनकी बस एक ही गुहार है हमारे बेटे को सही सलामत हमारे पास वापस ले आइए।
पेंशनर्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेज रिहाई के प्रयास की उठाई मांग
ब्रिटेन में कैद चिल्किया गांव निवासी कैप्टन अजय पंत की रिहाई के लिए आवाज उठने लगी है। अजय के पिता वीसी पंत पेयजल निगम कर्मचारी संगठन के कई पदों पर रह चुके हें।
ऐसे में उत्तराखंड पेयजल पेंशनर्स एसोसिएशन भी इस मामले में आगे आया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष पीएस रावत ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। कहा कि उनके पिता अभी अपना उपचार कराकर लौटे हैं। परिवार अवसाद में है। इसलिए कैप्टन अजय पंत के सकुशल वापसी के प्रयास कर उन्हें जल्द घर लाया जाए।