उत्तराखण्ड

Big Breaking:-जेनी प्रकरण: उत्तराखंड की राजनीति में भूचाल लाने वाला मामला, जानें किस तरह चला था आरोप-प्रत्यारोप का दौर

साल 2003 में असम की जेनी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत पर अपने बच्चे का पिता होने का आरोप लगाया था, जिससे उत्तराखंड की सियासत में तूफान आ गया था। डीएनए टेस्ट में हरक सिंह को क्लीन चिट मिली और बाद में जेनी के पते व मोबाइल नंबर फर्जी पाए गए।

देहरादून। उत्तराखंड को बने तीन साल भी पूरे नहीं हुए थे। पहाड़ की नई राजनीतिक व्यवस्था पांव जमाने की कोशिश कर रही थी। मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की सरकार थी और हरक सिंह रावत राजस्व मंत्री की कुर्सी पर बैठे थे। तभी एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने विधानसभा से लेकर सचिवालय और सियासी गलियारों में तूफान ला दिया।

इस प्रकरण के केंद्र में थी असम से आई एक अविवाहित युवती जेनी। जून 2003 में देहरादून के एक सरकारी अस्पताल में जेनी ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे के जन्म की यह घटना प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित मुद्दा उस समय बन गया, जब जेनी ने तत्कालीन राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत को बच्चे का पिता बताया।

18 जून 2003 को विधानसभा में विपक्षी दलों ने इस प्रकरण को सदन में उठाकर हंगामा किया। हरक सिंह रावत ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने सदन में भावुक होकर कहा था, ‘मैं इस्तीफा दे रहा हूं, जब तक बेदाग साबित नहीं हो जाता, विधानसभा में प्रवेश नहीं करूंगा।’

तब हरक ने भाजपा के साथ कांग्रेस के कुछ नेताओं पर भी साजिश का आरोप लगाया था। मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति की। 25 जुलाई 2003 को सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया।

सीबीआई ने डीएनए परीक्षण कराया। बच्चे से हरक सिंह रावत के डीएनए सैंपल मैच नहीं हुए और हरक सिंह को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई।

जेनी को तलाशती रही पुलिस, मोबाइल बंद और पता निकला फर्जी

हरक पर आरोप लगाने और बाद में शिकायत वापस लेने वाली जेनी को बाद में उत्तराखंड पुलिस तलाशती रही, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। पुलिस की छानबीन में महिला का मोबाइल फोन बंद मिला, जबकि उसने दिल्ली का जो पता दिया था, वह भी गलत निकला।

पुलिस ने उसे तलाशने के लिए दिल्ली पुलिस की मदद तक मांगी थी। 13 अगस्त 2016 को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में पुलिस को पता चला कि महिला जिस मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रही थी, वह किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत था।

देहरादून पुलिस को उसके बताए पते के भी गलत होने की जानकारी मिली। उत्तराखंड पुलिस ने दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव क्षेत्र की पुलिस से संपर्क कर उसकी तलाश में सहयोग मांगा था, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

तब हरीश रावत तक पहुंची थी साजिश की आंच

जेनी प्रकरण में वर्ष 2016 में उस समय नया मोड़ आया, जब शिकायत वापस लेने के बाद महिला ने तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए।

महिला ने कहा कि उसे हरक सिंह रावत के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए हरीश रावत ने उकसाया था। इस पर मुख्यमंत्री के निजी सचिव कमल सिंह रावत ने देहरादून कोतवाली में जेनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

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