Big Breaking:-उत्तराखंड रोडवेज पर 100 करोड़ का कर्ज, वेतन न मिलने से कर्मचारी परेशान

उत्तराखंड परिवहन निगम 100 करोड़ रुपये के भारी घाटे में है। कर्मचारियों को दो महीने से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।

देहरादून । उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) तमाम प्रयासों के बाद भी घाटे से नहीं उबर पा रहा है। निगम पर विभिन्न मदों में तकरीबन 100 करोड़ की देनदारी हो गई है। कर्मचारियों के वेतन का दो माह बैकलाग चल रहा है।

होली पर्व पर बसों का संचालन कम होने से निगम राजस्व नहीं जुटा पाया। वहीं निगम की तकरीबन 400 बसें भी जीवनकाल पूरा करने के अंतिम चरण पर है। समय रहते संसाधनों में बढ़ोत्तरी नहीं की गई। तो आने वाले समय में निगम की स्थिति और खराब हो जाएगी। हालांकि अधिकारी निगम की आय बढ़ाने को लेकर तमाम दावे कर रहे हैं।

दरअसल, दिन प्रतिदिन परिवहन निगम की स्थिति बदहाल होती जा रही है। निगम के मंडल कार्यालय पूरी तरह से खंडर हो चुके हैं। भवन जीर्णोद्धार के लिए निगम के पास बजट तक नहीं है। कर्मचारी टूटी कुर्सी में बैठकर कामकाज निपटा रहे हैं।

वेतन समय पर न मिलने से कर्मचारी बच्चों की स्कूल की फीस समय पर नहीं भर पा रहे हैं।कर्मचारियों ने निजी स्कूल से बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूलों में दाखिले करने शुरू कर दिए हैं। स्पेयर पार्ट का समय से भुगतान न करने पर बसें कई बार वर्कशाप में खड़ी हो जाती है। कर्मचारियों का बकाया वेतन की राशि न मिलने से समय पर समितियों में धनराशि जमा नहीं हो पा रही है।

विशेष पर्व पर जिन कर्मचारियों ने समिति से लोन लिया है। वेतन न मिलने से ब्याज की धनराशि बढ़ती जा रही है। कई बार कर्मचारी भुगतान को लेकर मंडलीय स्तर पर आंदोलन कर चुके हैं। लेकिन आश्वासन देकर अधिकारी निकल जाते हैं।

विभिन्न मदों में इतना किया जाना भुगतान

अधिकारी एवं कर्मचारियों को तकरीबन प्रतिमाह 18 करोड़ वेतन का भुगतान किया जाता है। दो माह से वेतन न मिलने से जो अब 36 करोड़ हो गया है। अनुबंधित बसों को प्रतिमाह आठ करोड़ की धनराशि का भुगतान किया जाता है। स्पेयर पार्ट का तकरीबन चार करोड़, समितियों में जमा होने वाली धनराशि का 22 करोड़ रुपये, अन्य खर्चे में दो करोड़ की देनदारी हो गई है।

डग्गामार बसों के संचालन से निगम घाटे से नहीं उबर पा रहा है। लेकिन केंद्र सरकार से जो गजट नोटिफिकेशन आया है। जिसे एक अप्रैल से लागू किया जाना है। उससे निगम को बढ़ा फायदा मिलेगा। जिससे निगम को अच्छा राजस्व प्राप्त होगा। – क्रांति सिंह, महाप्रबंधक (संचालन)

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