दुबई में शुरू हुई प्रेम कहानी मंगलवार को हल्द्वानी में शादी के बंधन तक पहुंची, जहां बागेश्वर के नवीन परिहार ने थाईलैंड की मोराया से कुमाऊंनी रीति-रिवाज से विवाह किया।
हल्द्वानी। प्यार की कोई सरहद नहीं होती, यह बात एक बार फिर सच साबित हुई है। तीन साल पहले दुबई में हुई एक मुलाकात से शुरू हुई कहानी मंगलवार को हल्द्वानी के रानीबाग स्थित शीतला माता मंदिर में शादी के बंधन तक पहुंच गई।

बागेश्वर के नवीन परिहार उर्फ नब्बू ने थाईलैंड की मोराया के साथ कुमाऊंनी रीति-रिवाज से सात फेरे लिए। खास बात यह रही कि विदेशी दुल्हन ने उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा धारण करने के साथ यहां की विवाह परंपराओं को भी पूरे उत्साह से अपनाया।

कुमाऊंनी दुल्हन के रूप में सजीं मोराया
दशहरे के दिन शीतला माता मंदिर में हुई शादी में मोराया पारंपरिक कुमाऊंनी दुल्हन के रूप में नजर आईं। सिर पर मुकुट, नाक में पारंपरिक नथ, माथे पर मांग टीका और गले में मंगलसूत्र पहने मोराया ने नवीन के साथ विवाह की रस्में पूरी कीं। अलग देश और संस्कृति से होने के बावजूद उन्होंने भारतीय विवाह परंपराओं को समझने और निभाने में खास दिलचस्पी दिखाई।

कुमाऊंनी विवाह की रस्में मोराया के लिए नई थीं। ऐसे में उन्हें समझाने के लिए अंग्रेजी अनुवादक की मदद ली गई। इसके बाद उन्होंने एक-एक रस्म को समझा और पूरे उत्साह से उसमें भाग लिया। इस खास मौके पर थाईलैंड से आए उनके भाई और भाभी ने भी कुमाऊंनी परंपरा के अनुसार कन्यादान की रस्म निभाई।

दुबई में हुई मुलाकात, दोस्ती से शुरू हुई प्रेम कहानी
बागेश्वर जिले के उडल गांव निवासी नवीन परिहार की करीब तीन साल पहले दुबई में मोराया से मुलाकात हुई थी। नवीन रोजगार के सिलसिले में दुबई गए थे। दोनों की मुलाकातों का सिलसिला आगे बढ़ा तो दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। एक-दूसरे को समझने और करीब आने के बाद दोनों ने साथ जीवन बिताने का फैसला किया।
नवीन ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई बागेश्वर में की। इसके बाद हल्द्वानी से होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और रोजगार के लिए दुबई चले गए। उनके पिता पूरन सिंह परिहार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से सेवानिवृत्त हैं।
परिवार की सुविधा के लिए हल्द्वानी में चुनी शादी की जगह
नवीन की बहन बेबी धपोला हल्द्वानी के देवलचौड़ क्षेत्र में रहती हैं। परिवार की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विवाह के लिए हल्द्वानी को चुना गया। नवीन पिछले तीन महीने से हल्द्वानी में रह रहे थे। सोमवार को देवलचौड़ स्थित उनकी बहन के घर पर विवाह से जुड़ी पारिवारिक रस्में निभाई गईं। इसके बाद मंगलवार को कुमाऊंनी पुरोहित ने वैदिक रीति-रिवाज से दोनों का विवाह संपन्न कराया।
नवीन के पिता पूरन सिंह परिहार ने बताया कि बेटा अपनी पसंद से मोराया के साथ जीवन बिताना चाहता था और परिवार इस रिश्ते से खुश है। कुछ परेशानियों के चलते परिवार के लिए विदेश जाना संभव नहीं था, इसलिए हल्द्वानी में ही शादी करने का निर्णय लिया गया।
विवाह के बाद बुधवार को नवीन और मोराया परिवार के साथ बागेश्वर स्थित अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हुए। वहां मोराया को घर-परिवार और अपनी संस्कृति से परिचित कराया गया।
विजयादशमी पर मंदिर में हुए पांच विवाह
शीतला माता मंदिर समिति के अध्यक्ष सचिन साह ने बताया कि विजयादशमी के अवसर पर मंदिर में कुल पांच विवाह संपन्न हुए। इनमें एक विवाह थाईलैंड की युवती और बागेश्वर के युवक का था। सभी विवाह परिवारों की मौजूदगी में संपन्न कराए गए।



