उत्तराखण्ड

Big Breaking:-उत्तराखंंड की फूलों की घाटी में पर्यटकों का नया रिकॉर्ड, विदेशी सैलानियों की भी बढ़ी संख्या, दिलचस्प है इतिहास

विश्व धरोहर फूलों की घाटी में इस वर्ष पर्यटकों की रिकॉर्ड भीड़ उमड़ रही है, जिसमें 12 विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं। घाटी में 20 से अधिक प्रजाति के रंग-बिरंगे फूल खिले हैं, जिससे पार्क प्रशासन को 4.90 लाख रुपये की आय हुई है।

गोपेश्वर। विश्व धरोहर फूलों की घाटी का दीदार करने के लिए पर्यटकों की भीड़ उमड़ रहीं हैं। फूलों की घाटी में 12,विदेशी पर्यटक भी पहुंच चुके हैं। फूलों की घाटी सफर के दौरान पर्यटकों को 20 से अधिक प्रजाति के रंग विरंगे फूलों का दीदार हो रहे हैं ।


फूलों की घाटी प्रत्येक वर्ष एक जून को खुलकर 31 अक्टूबर को पर्यटकों के लिए बंद हो जाती है। शीतकाल में फूलों की घाटी बर्फ से ढ़की रहती है। यहां पर जैवविविधता हो खजाना है। प्राकृतिक रंग विरंगे फूलों के साथ दुलर्भ जंगली जानवरों का यह क्षेत्र प्राकृतिक आवास है।

फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं

यहां पर हिमालयन थार, कस्तुरा मृग, हिम तेंदुआ सहित अन्य जंगली जानवर घूमते देखे जाते हैं। फूलों की घाटी में 500 से अधिक प्रजाति के फूल खिलते हैं। फूलों की घाटी का आकर्षण कभी भी कम नहीं होता । यहां पर हर पंद्रह दिनों में फूलों की अलग प्रजाति खिलने से घाटी का रंग भी बदल जाता है।

पैदल 10 किमी पैदल चलकर फूलों की घाटी के बेस कैंप घांघरिया पहुंचा जाता है

फूलों की घाटी में आने के लिए बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ज्योतिर्मठ के गोविंदघाट पुलना से पैदल 10 किमी पैदल चलकर फूलों की घाटी के बेस कैंप घांघरिया पहुंचा जाता है। यहां से तीन किमी पैदल चलकर फूलों की घाटी पहुंचा जाता है। फूलों की घाटी कुल 87.5 वर्ग किमी में फैली हुई है। फूलों की घाटी में सुबह जाकर सांय पांच बजे तक वापस आना जरूरी है।

पर्यटकों को रूकने की इजाजत भी नहीं 

घाटी में पर्यटकों को रूकने की इजाजत भी नहीं है। पर्यटक को अपने साथ खाने या अन्य जरूरी सामग्री ले जानी पड़ती है। घांघरिया से फूलों की घाटी क्षेत्र में कोई भी खाद्य सामग्री की दुकान आदि भी नही है। फूलों की घाटी में पांच किमी क्षेत्र तक जाने की अनुमति है। यहां पर पुष्पावती नदी भी बहती है। जिसका साफ पानी लोगों को मोहित करता है।

अब तक आए इतने सैलानी

फूलों की घाटी में इस वर्ष अब तक 2698 भारतीय व 12 विदेशी पर्यटक पहुंच चुके हैं ,जिनसे राष्ट्रीय पार्क प्रशासन को 490000 की आय हुई है। जबकि पिछले साल फूलों की घाटी खुलने के 14 दिन में 1427 पर्यटक घाटी पहुंचे थे जिनसे पार्क प्रशासन को 273100 की आय हुई थी।

ये फूल खिल रहे हैं इन दिनों फूलों की घाटी में

प्रिम्युला डेंटिकुलाटा , पोटेंटीला एट्रोसैंगुइनिया, रोडोडेंड्रोन कैम्पैन्युलेटम, रोडोडेंड्रोन लेपिडोटम, थाइमस (बन आजवाइन), कोबरा लिली (एरीसिमा) स्नेक लिली, कोरिडालिस काश्मीरियाना, आइरिस कुमाऊँ नेनसिस, एलियम ह्यूमाइल, फ्रिटिलेरिया रॉयली, वियोला बाइफ्लोरा, जैस्मिनम ह्यूमाइल, मार्श मैरीगोल्ड, सिरिंगा इमोडी, थर्मोप्सिस बारबाटा, लिलियम ऑक्सीपेटलम, एनीमोन रतनजोत, अर्नेबिया बेंथमी आदि।

रास्ता भूल कर पहुंचे थे फूलों की घाटी में फ्रैंचस्मित

फूलों की घाटी को 1982 में राष्ट्रीय पार्क व 2005 में यूनैस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया। फूलों की घाटी की खोज 1931 में कामेट पर्वतारोहण के लिए गए ब्रिटिश पर्वतारोही फ्रेंकस्मित ने किया था। बताया गया कि वे कामेट पर्वत से लौटते हुए रास्ता भूल कर फूलों की घाटी में आए । यहां पर रंग विरंगे फूलों को देख कर वे खासे मोहित हो गए थे।

फिर वे 1937 में फिर फूलों की घाटी की यात्रा पर आए । तथा यहां से बतन वापसी के बाद 1938 में वैली आफ फ्लावर नामक किताब लिखकर इस अनाम घाटी को देश दुनिया के सामने रखा। आज भी विदेशी पर्यटकों के लिए फूलों की घाटी किसी सपने से कम नहीं है।

ये है शुल्क

फूलों की घाटी का दीदार करने के लिए शुल्क भी लिया जाता है। पर्यटक घांघरिया में फूलों की घाटी प्रशासन के कार्यालय में शुल्क जमा करता है। इसके लिए भारतीय नागरिक के लिए 200 , छात्र या 60 साल से अधिक बजुर्ग के लिए 100 विदेशी पर्यटक के लिए 800 रूपए का शुल्क निर्धारित है।

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