
बदरीनाथ महायोजना के तहत मंदिर के आसपास के 22 भवनों को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे कार्य में तेजी आएगी।
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में महायोजना के कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि बदरीनाथ मंदिर के आसपास के बाकी घरों को खाली कराने का काम शुरू करा दिया गया है।
भवन खाली न करने की जिद पर अड़े 22 भवन स्वामी अपने भवन खाली करने को तैयार हैं। इनमें से एक ने तो भवन खाली कर प्रशासन को कब्जा भी सौंप दिया है।

बदरीनाथ महायोजना के अंतिम चरण में मंदिर के 75 मीटर के दायरे में नारायण पर्वत की ओर सुंदरीकरण की योजना धरातल पर उतारी जानी है। इसके लिए इस क्षेत्र से कुल 74 भवनों को हटाया जाना था।
इनमें से 52 भवन स्वामियों को मुआवजा देकर पहले ही उनके भवन हटाए जा चुके हैं, लेकिन 22 भवन स्वामी मुआवजा विवाद के चलते भवनों को खाली नहीं कर रहे थे।
इससे महायोजना का कार्य कर रही लोनिवि की प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (पीआइयू) कार्य को आगे नहीं बढ़ा पा रही थी।
बताया गया कि प्रशासन के प्रयासों से अब ये 22 भवन स्वामी भी अपने भवनों को छोड़ने के लिए राजी हो गए हैं। इनमें से एक भवन स्वामी ने तो भवन खाली कर उसका कब्जा प्रशासन को सौंप दिया है।
बताया गया कि जल्द अन्य भवन स्वामी भी भवनों को खाली कर देंगे। इसके बाद निर्माण एजेंसी यहां से भवनों का मलबा हटाने का कार्य शुरू करेगी।
ईवी ट्रैक व रिवर फ्रंट के कार्य ने पकड़ी रफ्तार
बदरीनाथ महायोजना का कार्य कर रही पीआइयू के अधिशाशी अभियंता एवं प्रोजेक्ट प्रभारी योगेश मनराल ने बताया कि धाम में रिवर फ्रंट व ईवी ट्रैक का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मानूसन से पहले अलकनंदा नदी के किनारे होने वाले कार्यों को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। धाम में अलकनंदा नदी के किनारे नर पर्वत की ओर ईवी ट्रैक बनाया जा रहा है।
यह ट्रैक दो पुलों के जरिये नारायण पर्वत पर बदरीनाथ मंदिर के रास्ते से जुड़ेगा। बताया गया कि 45 बेड के चिकित्सालय का निर्माण भी अंतिम चरण में है। जबकि, टूरिस्ट मैनेजमेंट सेंटर का कार्य पूरा हो गया है।








