Big Breaking:-ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोपवे: वन्यजीव संरक्षण के साथ बनेगा देश का पहला ग्रीन कॉरिडोर

ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोपवे भारत का पहला ग्रीन रोपवे बनेगा, जिसमें वन्यजीवों के लिए विशेष कॉरिडोर होगा। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड द्वारा अनुमोदित यह 6.5 किमी परियोजना हाथियों और तेंदुओं जैसे जानवरों के सुरक्षित मार्ग को सुनिश्चित करेगी।

देहरादून। योगनगरी ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव मंदिर तक बनने वाला रोपवे प्रोजेक्ट अब केवल श्रद्धालुओं की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा।

इसे राज्य सरकार पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण का माडल बनाने जा रही है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने परियोजना को मंजूरी देने में स्पष्ट किया है कि रोपवे निर्माण से वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

इसलिए राज्य सरकार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर नीलकंठ महादेव रोपवे प्रोजेक्ट में विशेष वन्यजीव कारिडोर विकसित करेगी, ताकि रोपवे के नीचे से हाथी, तेंदुआ, हिरण समेत अन्य वन्यजीव सुरक्षित रूप से अपने पारंपरिक मार्गों से गुजर सकें।

ऋषिकेश-नीलकंठ महादेव रोपवे प्रोजेक्ट ने गति पकड़ ली है। राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी के बाद जिला प्रशासन ने परियोजना के लिए एक हेक्टेयर भूमि भी उपलब्ध करा दी है, अब भारतीय वन्य जीव संस्थान की रिपोर्ट के बाद वनभूमि पर भी सरकार को कब्जा मिल जाएगा।

इससे करीब 450 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना जल्द धरातल पर उतर सकेगी। यह माडल पूरी तरह लागू होने पर ऋषिकेश-नीलकंठ रोपवे देश का पहला ग्रीन रोपवे बन जाएगा, जिसमें वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास होगा।

6.5 किलोमीटर दूरी 15 मिनट में पूरी होगी

सचिव आवास आर राजेश कुमार के अनुसार, करीब 6.5 किलोमीटर लंबे इस रोपवे के बनने के बाद श्रद्धालु ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव तक की यात्रा 15 मिनट में पूरी कर सकेंगे।

वर्तमान में श्रद्धालुओं को लगभग 30 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग या करीब नौ किलोमीटर पैदल ट्रैक तय करना पड़ता है।

रोपवे का निर्माण ऋषिकेश के तपोवन से त्रिवेणीघाट होते हुए नीलकंठ महादेव मंदिर तक किया जाएगा।

यह पूरा क्षेत्र राजाजी टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र और गंगा के आसपास फैले घने जंगलों से होकर गुजरता है। यही कारण है कि परियोजना को लेकर पर्यावरणीय सतर्कता बरती जा रही है।

हाथियों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण

प्रस्तावित रोपवे मुख्य रूप से राजाजी टाइगर रिजर्व के संवेदनशील वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा। रोपवे का मार्ग त्रिवेणीघाट क्षेत्र से आगे बढ़ते हुए गंगा के पार फैले घने जंगलों और नीलकंठ मार्ग के वन क्षेत्र से होकर जाएगा।

यह क्षेत्र एशियाई हाथियों की आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा यहां तेंदुआ, सांभर, चीतल, काकड़, जंगली सूअर, नीलगाय, घुरल, लंगूर और बंदर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। कुछ हिस्सों में बाघ की गतिविधियां भी दर्ज की गई हैं।

इसी संवेदनशील जैव विविधता को देखते हुए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड ने परियोजना को मंजूरी देते समय शर्त रखी है कि वन्यजीवों के पारंपरिक रास्ते बाधित नहीं होने चाहिए।

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