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Big Breaking:-उत्तराखंड में बंद और विवादित मदरसों पर सख्त निगरानी, नियुक्त होंगे रिसीवर

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बंद और विवादित मदरसों की निगरानी करेगा, भूमि विवादों और अवैध संचालन की जांच के लिए रिसीवर नियुक्त करेगा।

देहरादून। उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में बंद और विवादित मदरसे भी होंगे। इन पर भी सख्ती से नजर रखी जाएगी।

प्राधिकरण प्रदेश के कुल पंजीकृत 452 मदरसों में से बंद पड़े 30 एवं भूमि विवाद से जुड़े मदरसों के लिए रिसीवर नियुक्त करने जा रहा है।

प्राधिकरण संचालित हो रहे मदरसों के साथ बंद पड़े मदरसों को लेकर सतर्कता बरतेगा। कुछ मदरसों के सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर गुपचुप तरीके से संचालित होने की शिकायतें भी शासन तक पहुंची हैं।

ऐसे मामलों में प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने और गैरकानूनी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से रिसीवर तैनात किए जाएंगे। शासन स्तर पर इसकी विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है।

सरकार विवादित मदरसों के दस्तावेजों और भूमि अभिलेखों की भी जांच कराएगी। प्रशासन यह पता लगाएगा कि संबंधित संस्थान वैध स्वामित्व वाली भूमि पर संचालित हो रहे हैं या नहीं। जिन मामलों में अनियमितता मिलेगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड शासन के एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय के अंतर्गत उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को एक जुलाई, 2026 से विधिवत रूप से समाप्त किया जा रहा है। इसके स्थान पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण को समस्त अधिकार एवं दायित्व सौंपे जाएंगे।

राज्य में वर्तमान में 452 पंजीकृत मदरसे संचालित हैं, जिनमें से नौवीं से 12वीं तक के 30 मदरसे विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं। नई व्यवस्था के तहत इन संस्थानों की कार्यप्रणाली, वित्तीय स्थिति और प्रशासनिक ढांचे की निगरानी अधिक सख्ती से की जाएगी।

प्राधिकरण प्रत्येक आवेदन की समीक्षा करेगा

प्राधिकरण प्रत्येक आवेदन की विस्तृत समीक्षा करेगा। आवश्यकता पड़ने पर संस्थानों का भौतिक निरीक्षण भी कराया जाएगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देने के बाद मान्यता निरस्त करने का प्रविधान रखा गया है।

आवेदन की समीक्षा में संस्थान की अल्पसंख्यक पहचान, भूमि स्वामित्व, वित्तीय स्थिति, स्टाफ की योग्यता तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की प्रतिबद्धता का परीक्षण किया जाएगा।

‘पंजीकृत मदरसों को नई व्यवस्था के अंतर्गत लाना एक सुव्यवस्थित एवं ऐतिहासिक सुधार है। अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण न केवल इन संस्थानों को कानूनी संरक्षण प्रदान करेगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता एवं सामाजिक सौहार्द को भी सुदृढ़ करेगा। राज्य सरकार सभी समुदायों के समग्र विकास के लिए सदैव तत्पर है।’
– खजान दास, समाज कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री

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