
मुख्यमंत्री धामी की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पहल अब रंग ला रही है, जिसमें अन्य राज्य भी मसौदा तैयार कर रहे हैं।
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किया तब यह मामला काफी चर्चाओं में रहा।
संविधान निर्माता से लेकर सर्वोच्च न्यायालय यूसीसी पर मंशा जताती रही। उत्तराखंड की मजबूत पहल अब रंग दिखाने लगी।
अब कई राज्यों में यूसीसी को लेकर मसौदा तैयार किया जा रहा है। देश भी यूसीसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हलाला जैसे प्रकरण पर क्या कहती है यूसीसी
यूसीसी में हलाला शब्द को तो सीधा जिक्र नहीं किया गया है लेकिन इस तरह के प्रकरणों के लिए व्यवस्था की गई है।
यूसीसी की धारा 30 की उपधारा दो में कहा गया है कि यदि पुनर्विवाह के अधिकार में विवाह-विच्छेदित पति या पत्नी का एक दूसरे से पुनर्विवाह बिना किसी शर्त के अनुमन्य होगा। पुनर्विवाह से पूर्व किसी तीसरे व्यक्ति से विवाह करने जैसी शर्त नहीं होगी।
यूसीसी की धारा 32 की उपधारा में विभिन्न धाराओं के उल्लंघन के लिए दंड का प्रविधान किया गया है।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि को धारा 30 की उपधारा दो में दी गई किसी भी बाधा के अनुरूप आचरण करने के लिए विवश, दुष्प्रेरित या अभिप्रेरित करता है तो आरोपित को तीन वर्ष तक की सजा तथा एक लाख का जुर्माना और जुर्माना न देने तक छह माह तक के अतिरिक्त कारावास की सजा होगी।









