
पिथौरागढ़ के धारचूला में एक दुर्गम चट्टान पर तीन दिनों से फंसी बकरियों को बचाने के लिए एसडीआरएफ को बुलाया गया। रौंझाड़ गांव के गोपाल दत्त भट्ट की छह बकरियां चट्टान पर चढ़कर फंस गई थीं।
एसडीआरएफ जवानों ने रस्सियों के सहारे चढ़कर तीन बकरियों को सुरक्षित निकाला। हालांकि, दो बकरियों की गिरने से मौत हो गई और एक लापता है।
पिथौरागढ़। धारचूला तहसील के बलुवाकोट ग्राम पंचायत के रौंझाड़ गांव में बीस मीटर से अधिक ऊंची एक दुर्गम चट्टान पर तीन दिनों से फंसी बकरियों को निकालने के लिए एसडीआरएफ को बुलाना पड़ा।
एसडीआरएफ के जवानों ने रस्सियों के सहारे चट्टान पर चढ़कर तीन बकरियों को सुरक्षित निकाला। एक बकरी लातपा है, जबकि दो बकरियों की चट्टान से फिसल कर गिरने से मौत हो गई।
पंथागांव के निकट रौझाड़ गांव निवासी गोपाल दत्त भट्ट की छह बकरियां चरते-चरते दुर्गम और अति दुष्कर मानी जाने वाली चट्टान पर चढ़ गई और वहां पहुंच कर फंस गई।
अमूमन यही माना जाता है कि बकरियां चट्टानों से भी निकल जाती है, लेकिन चट्टान में चढ़ चुकी बकरियां नीचे नहीं उतर सकीं।
बकरी पालक द्वारा तमाम प्रयास किए गए, लेकिन वह सफल नहीं रहा। बाद में ग्रामीणो ने भी प्रयास किया। बकरियों को चट्टान से निकाल पाने में असफल हो गए।
गोपाल दत्त ने जिला पंचायत सदस्य दीप शिखा ऐरी और पूर्व सैनिक चंचल सिंह ऐरी को इसकी सूचना दी। जिसमें बकरियों को बचाने की मांग की।
चट्टान तक ग्रामीणों का पहुंचना संभव नहीं होने पर, जिपं सदस्य दीपशिखा और चंचल ऐरी ने रविवार की देर सायं धारचूला तहसील प्रशासन को स्थिति से अवगत कराया। वन विभाग ने उपकरण नहीं होने से अपनी लाचारी जताई।
सोमवार को राजस्व टीम एसडीआरएफ जवानों के साथ पहुंची। बकरियों को बचाने का रेस्क्यू चला। एसडीआरएफ के जवान रस्सियों के सहारे चट्टान पर चढ़े ओर तीन बकरियों को सुरक्षित निकाला।
दो बकरियों की चटटान से गिरकर मौत हो गई है और एक बकरी लापता है। बकरियों को बचाने के लिए रेस्क्यू किए जाने पर बकरी पालक गोपाल दत्त ने राजस्व टीम, एसडीआरएफ, जिपं सदस्य और पूर्व सैनिक का आभार जताया है।








