Big Breaking:-देहरादून में मदरसा का औचक निरीक्षण, बेसमेंट में था हॉस्टल; जिस हालत में मिले बच्चे रिपोर्ट तलब

देहरादून के मदरसा इमदादूल उलूम में बाल आयोग की टीम ने निरीक्षण के दौरान बिहार समेत अन्य राज्यों के बच्चों की बड़ी संख्या, बेसमेंट में क्षमता से अधिक बच्चों वाले छोटे हॉस्टल और अग्नि सुरक्षा व नक्शा स्वीकृति की कमी पाई।

देहरादून । मदरसा इमदादूल उलूम में बाल आयोग की टीम निरीक्षण करने पहुंची। इस दौरान मदरसे में बिहार समेत अन्य प्रदेशों के बच्चे बड़ी संख्या में मिले, जबकि स्थानीय बच्चे बेहद कम मिले।

वहीं, मदरसे के बेसमेंट में हॉस्टल संचालित कर बेहद छोटे कमरों में बच्चों को रखा जा रहा है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य के प्रति गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। उधर, आयोग अध्यक्ष ने प्रकरण में संबंधित विभागों और प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर कार्रवाई करने की बात कही है।

मदरसे में बड़ी संख्या में बिहार और अन्य प्रदेशों के बच्चे

विभिन्न अनियमितताओं और एक प्रतिष्ठित एनजीओ की ओर से यौन शोषण की शिकायत पर शुक्रवार को उत्तराखड़ राज्य बाल संरक्षण अधिकार आयोग की टीम ने मदरसा इमदादूल उलूम किशनपुर का निरीक्षण किया। इस दौरान मदरसे में बड़ी संख्या में बिहार और अन्य प्रदेशों के बच्चे मौजूद मिले, जबकि स्थानीय बच्चों की संख्या बहुत कम मिली।

मदरसे में नक्शा और अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं पाए गए। आयोग अध्यक्ष डा. गीता खन्ना ने बताया कि मदरसे के बेसमेंट में हॉस्टल संचालित हो रहा है । निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को छोटे कमरों में रखा जा रहा है। बच्चों ने बातचीत के दौरान बताया कि उनके माता-पिता जीवित हैं। उन्हें यहां बेहतर शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेजा गया है।

डा. गीता खन्ना ने बताया कि मदरसे में किस प्रकार का वातावरण है। बच्चों को किस तरह की शिक्षा, खाना-पान और मानसिक स्थिति जांच के दायरे में है। किसी भी स्थिति में बच्चों का गलत इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग व प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हॉस्टल के लिए स्पष्ट नियमावली जरूरी

डा. गीता खन्ना ने कहा कि राज्य में संचालित सभी प्रकार के हॉस्टलों के लिए स्पष्ट नियमावली बनाया जरूरी हो गया है। वहीं, स्कूल हॉस्टलों पर लागू सुरक्षा एवं संचालन संबंधी नियम सभी संस्थानों पर बराबर लागू होने चाहिए।

सभी हॉस्टलों का पंजीकरण अनिवार्य होना चाहिए। उन्होंने चंपावत की नाबालिग किशोरी का इंटरनेट मीडिया पर वायरल वीडियो को किशोर न्याय अधिनियम एवं बाल संरक्षण कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि ऐसे वीडियो को प्रसारित नहीं किया जाए।

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