उत्तराखंड में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए ‘एक मंडी-एक गांव’ योजना शुरू की गई है। इसके तहत 23 कृषि उत्पादन मंडी समितियां एक-एक गांव गोद लेकर उन्हें मॉडल कृषि विपणन ग्राम के रूप में विकसित करेंगी, जिससे किसानों को गांव के पास ही बाजार मिलेगा।
देहरादून। उत्तराखंड के पर्वतीय व मैदानी क्षेत्रों में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने को नई पहल की गई है। सभी 23 कृषि उत्पादन मंडी समितियां अब एक-एक गांव गोद लेकर उन्हें माडल कृषि विपणन ग्राम के रूप में विकसित करेंगी। एक मंडी-एक गांव योजना के तहत चयनित गांवों में किसानों को उपज के विपणन, भंडारण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्द्धन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
राज्य में कृषि उत्पादन की पर्याप्त संभावनाओं के बावजूद किसानों को कई स्तर पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। विशेषकर, पहाड़ में बाजार की दूरी, सीमित भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में किसानों को उपज का अपेक्षित दाम नहीं मिल पाता।
एक मंडी-एक गांव योजना
कई बार उत्पाद को स्थानीय बाजार में ही कम कीमत पर बेचना मजबूरी रहती है। इस सबके दृष्टिगत उत्तराखंड कृषि उत्पादन विपणन बोर्ड के माध्यम से जून में एक मंडी-एक गांव माडल ग्राम गोद योजना शुरू करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत मॉडल कृषि विपणन ग्राम विकसित होने से किसानों को गांव के आसपास ही अपनी उपज के विपणन की सुविधा मिल सकेगी।
गांवों के चयन में प्राथमिकता
योजना में उन गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी जो कृषि प्रधान हों। साथ ही बेहतर फल-सब्जी उत्पादन व जैविक क्षेत्र, एफओपी, एसएचजी, सहकारी समितियों से सक्रिय ग्रामों और दुर्गम व पर्वतीय क्षेत्र के गांवों को भी चयन में तवज्जो दी जाएगी। प्रत्येक मंडी समिति तीन वर्ष के लिए एक-एक गांव चयनित कर उसे गोद लेगी और फिर वहां स्थानीय उत्पादों के विपणन को आधारभूत सुविधाएं विकसित करेगी। चयनित गांव को एक वर्ष के लिए विशेष विकास पैकेज भी मिलेगा।
ये उठाए जाएंगे कदम
चयनित गांवों में मिनी कलेक्शन सेंटर, ग्रामीण हाट-मिनी मंडी, इलेक्ट्रानिक कांटा, ग्रेडिंग व पैकेजिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज-कोल्ड रूम, गोदाम, परिवहन सहायता को कदम उठाए जाएंगे। उन्नत बीज वितरण, सब्सिडी आधारित पालीहाउस, जैविक खाद इकाई, मिलेट-मसाला प्रसंस्करण यूनिट, फल प्रसंस्करण, शहद एवं औषधीय उत्पाद, ब्रांडिंग व पैकेजिंग समेत डिजिटल व मार्केट लिंंकेज, क्षमता निर्माण की दिशा में कवायद होगी।
मंडी समितियां कर रहीं गांवों का चयन
अभी तक रुद्रपुर, ऋषिकेश, मंगलौर, हरिद्वार, टनकपुर, हल्द्वानी, रामनगर, देहरादून, लक्सर, काशीपुर व रुड़की की मंडी समितियां एक-एक गांव का चयन कर चुकी हैं। शेष मंडी समितियां भी गांवों के चयन में जुटी हैं।
‘किसानों को गांव के पास ही बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई है। इससे किसानों को लाभ मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर भी सृजित होंगे।’
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गणेश जोशी, कृषि मंत्री