जोशीमठ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे में बदरीनाथ यात्रा से लौट रहे पांच दोस्तों और पायलट समेत छह लोगों की जान चली गई।
देहरादून। पांच दोस्त, आस्था की एक यात्रा और घर लौटने की साझा उम्मीद। बेंगलुरु और आसपास के इलाकों से आए इन दोस्तों ने चारधाम यात्रा के दौरान बदरीनाथ के दर्शन किए। इसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर से देहरादून लौटना था।
शायद परिवारों को भी उनके सकुशल लौटने का इंतजार रहा होगा। लेकिन पांच दोस्तों का यह साथ जोशीमठ के पास हुए हेलीकॉप्टर हादसे में हमेशा के लिए टूट गया। उनके साथ उड़ान भर रहे दिल्ली निवासी पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल की भी जान चली गई। छह लोगों की मौत ने कई घरों में ऐसा सन्नाटा भर दिया, जहां कुछ समय पहले तक अपनों की वापसी की उम्मीद थी।
किसी को अपने बच्चों के पास पहुंचना था, किसी को माता-पिता के बीच और किसी को कामकाज की जिम्मेदारियां संभालनी थीं। लेकिन जोशीमठ की पहाड़ियों में हुए हादसे ने इन सभी उम्मीदों को छीन लिया। अब इन परिवारों के पास अपनों की यादें हैं और वह सवाल, जिसका जवाब किसी के पास नहीं कि आस्था की यात्रा आखिर उनकी अंतिम यात्रा कैसे बन गई।
दो बच्चों के पिता थे पुलिस निरीक्षक अरुण
44 वर्षीय अरुण सालुंके बेंगलुरु पुलिस की केंद्रीय अपराध शाखा में निरीक्षक थे। मूल रूप से महाराष्ट्र के बेलगावी जिले के अरटाल गांव के रहने वाले अरुण बेंगलुरु के राममूर्ति नगर में पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते थे। पुलिस सेवा में उपनिरीक्षक और सर्किल निरीक्षक के रूप में काम करने के बाद वह केंद्रीय अपराध शाखा की तकनीकी इकाई में तैनात थे।
वर्दी में अपराधियों से मुकाबला करने वाले अरुण अपने परिवार के लिए पति और पिता थे। चारधाम यात्रा से लौटकर उन्हें फिर उसी जिंदगी में लौटना था, जहां पत्नी और बच्चों के साथ उनकी मौजूदगी घर का सबसे बड़ा सहारा थी। अब उनके बच्चे पिता के लौटने का इंतजार नहीं कर सकेंगे।
प्रताप के दो बेटों से छिन गया पिता का साथ
41 वर्षीय प्रताप बी. निंगराजू बेंगलुरु में सिविल ठेकेदारी करते थे। वह अपने माता-पिता के साथ रहते थे और उनके दो बेटे हैं। दोस्तों के साथ निकली धार्मिक यात्रा उनके लिए भी जीवन की व्यस्तताओं से कुछ पल दूर बिताने का अवसर रही होगी। लेकिन बदरीनाथ के दर्शन के बाद घर लौटने के बजाय उनकी मौत की खबर पहुंची।
माता-पिता ने बेटा खो दिया और दो बेटों के सिर से पिता का साया उठ गया। परिवार के लिए यह केवल एक सदस्य की मौत नहीं, बल्कि उस भविष्य का बिखरना है जिसमें प्रताप की मौजूदगी स्वाभाविक मानी जाती थी।
शंकर गौड़ा और सुधीर भी थे दोस्ती के इस सफर में
39 वर्षीय वीबी शंकर गौड़ा कर्नाटक स्टेट बार काउंसिल से जुड़े अधिवक्ता थे। 49 वर्षीय सुधीर के. भी वकालत करते थे। दोनों उन पांच यात्रियों में शामिल थे, जो साथ चारधाम के दर्शन करने निकले थे। दोस्तों के साथ शुरू हुआ सफर पांचों के लिए एक साझा स्मृति बनकर रह गया, ऐसी स्मृति, जिसका अंत किसी ने नहीं सोचा था।
पांच दोस्तों में शामिल थे शिक्षण संस्थान के प्रमुख नटराज
51 वर्षीय एचएस नटराज कर्नाटक के तुमकुर जिले के हुलियुरुदुर्ग क्षेत्र में विद्या भारती शिक्षण संस्थान के प्रमुख थे।
शिक्षा जगत से जुड़े नटराज की जिंदगी में परिवार के साथ संस्थान की जिम्मेदारियां भी अहम थीं। दोस्तों के साथ बदरीनाथ के दर्शन के बाद उन्हें अपने घर और कामकाज में लौटना था। उनकी मौत से परिवार के साथ संस्थान से जुड़े लोगों को भी अपूरणीय क्षति हुई है।
उड़ान के साथ थम गई कैप्टन हिमांशु की जिंदगी
हेलीकॉप्टर के पायलट 48 वर्षीय कैप्टन हिमांशु सभरवाल दिल्ली के शालीमार बाग के निवासी थे। वह पांच यात्रियों को बदरीनाथ से सहस्रधारा ला रहे थे।
इस उड़ान में यात्रियों के साथ उनकी जिंदगी का सफर भी समाप्त हो गया। यात्रियों के परिवारों की तरह उनके अपने भी अब उस शख्स के बिना जीवन बिताने को मजबूर हैं, जिसकी घर वापसी की उम्मीद रही होगी।



