उत्तराखंड में बिना मान्यता संचालित मदरसों पर कार्रवाई जारी है। प्रबंधकों को बच्चों को समीप के अल्पसंख्यक विद्यालय में दाखिला दिलाना होगा, और मान्यता के लिए आवेदन 30 सितंबर 2026 तक स्वीकार किए जाएंगे।
देहरादून। मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद भी बिना मान्यता संचालित हो रहे मदरसों के विरुद्ध उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण, समाज कल्याण विभाग और शिक्षा विभाग की कार्रवाई जारी है।
प्राधिकरण का मानना है कि मदरसा बंद करने से प्रबंधकों की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी, वहां पढ़ने वाले बच्चों को समीप के अल्पसंख्यक विद्यालय में दाखिले का भी पत्र लिखकर देना होगा। यदि 30 सितंबर, 2026 तक कोई मदरसा मान्यता के लिए आवेदन करता है तो उसे स्वीकार किया जाएगा।
अब तक 17 मदरसों को किया सील
राज्य सरकार के अनुसार अब तक 452 में से प्रदेश में कुल 17 मदरसों को सील किया जा चुका है। इनमें ऊधमसिंह नगर के आठ, हरिद्वार के चार, नैनीताल के चार और देहरादून का एक मदरसा शामिल है। तीन मदरसा प्रबंधकों ने स्वयं मदरसा बंद करने की लिखित सूचना दी है। इसके अलावा 200 मदरसों ने मान्यता को आवेदन किया है। 35 को सरकार की ओर से मान्यता दे दी गई है।
आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर तक स्वीकार किए जाएंगे आवेदन
अल्पसंख्यक मामलों के सचिव डॉक्टर पराग मधुकर धकाते ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में किसी भी शिक्षण संस्थान का संचालन निर्धारित नियमों एवं मान्यता के बिना नहीं होने दिया जाएगा। राज्य में लागू नई व्यवस्था के अंतर्गत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही निर्धारित शैक्षणिक मानकों का अनुपालन कराया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों के भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन कर संचालित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
बच्चों का भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के चेयरमैन डा. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय को परेशान करना नहीं है। उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण एवं आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।