शैलजा की चिठ्ठी पर हरीश रावत का आ गया जवाव
आसमानी शक्ति मेरा मार्गदर्शन करे।
‘प्यार पर पहरा’, ये जुमला बहुत सुनने में आता था। अब धन्यवाद कृतज्ञता ज्ञापन पर भी मैं बहुत गंभीर रूप से बीमार था। कई दिन मेदांता हॉस्पिटल के आईसीयू में भी रहा और बाहर भी रहा, तीन बार हॉस्पिटलाइज हुआ।
बड़ी संख्या में लगभग अनुमानतः मेरे 20,000–22,000 से अधिक भाई-बहन मुझे देखने या मेरी कुशलक्षेम पूछने के लिए आए। इधर ईडी और भाजपा साहब की कृपा हो गई। मेरे आत्म स्वाभिमान को कुरेद दिया। मैं डॉक्टर साहब की राय का उल्लंघन करके उत्तराखंड चला आया। कैसे ईडी को जवाब दिया जाए? भाजपा को कैसे जवाब दिया जाए उनके दुष्प्रचार का?
मैंने सीधे अपने उन्हीं भाई-बहनों जिनके आशीर्वाद से, जिस धरती के देवताओं के आशीर्वाद से मैं अत्यधिक गंभीर बीमारी से उभर सका और जिंदा वापस उत्तराखंड आ सका, उन्हें धन्यवाद देना, कृतज्ञता व्यक्त करना मुझे बहुत आवश्यक लगा। अभी वही काम कर रहा हूं। तिरंगा जरूर मेरे हाथ में है, मगर कहीं से भी मैंने इसको पार्टी का प्रोग्राम नहीं बनाया है।
हां, पार्टी के लोग जरूर इस प्रोग्राम में बढ़-चढ़कर के भाग ले रहे हैं। मैं उनका आभारी हूं। आखिर वर्षों का उनका साथी हूं। मुझको सकुशल फिर इधर सड़कों व गलियों में हाथ जोड़ते देख कर के उनके मन में भी गुदगुदी हुई है और वो उसी उत्साह में मेरे कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं। मैं उनका भी हमेशा आभारी रहूंगा। अब ईडी साहब से भी तो लड़ना है ना, भाजपा से भी लड़ना है।



