
युवक और युवती के बीच खूनी संघर्ष हो गया। इस दौरान युवती इतनी बुरी तरह घायल हुई कि सिर्फ 30 मिनट की ही सांसें शेष रह गई थीं। गले की मुख्य जुबिलर नस तक घाव था। डॉक्टरों ने बड़ी मुश्किल से युवती की जान बचाई।
क्लेमेंटटाउन थानाक्षेत्र के ओगलभट्टा इलाके में हुई घटना के बाद घायल युवती की जान मुश्किल से बचाई जा सकी है। ऑपरेशन को अंजाम देने वाले चिकित्सक दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. रविंद्र सिंह बिष्ट के मुताबिक युवती की सिर्फ 30 मिनट की ही सांसें शेष रह गई थीं। गले की मुख्य जुबिलर नस तक घाव था।
जानकारी के अनुसार घटना दोपहर करीब 11 से 12 बजे के बीच की है। युवती दो बजे दून अस्पताल की इमरजेंसी पहुंची। फौरन चिकित्सक उसे इमरजेंसी ओटी में लेकर गए। उसका रक्तचाप सामान्य से बेहद कम था। ऐसे में डॉक्टर भी हार मानने लगे थे।
इसके बाद एनेस्थेटिक ने कई डोज दिए तो रक्त चाप बढ़ना शुरू हुआ। काफी देर बाद युवती की हालत ऑपरेशन करने के लायक हो पाई। मौके पर मौजूद ईएनटी विभाग के डॉक्टरों की टीम ने दो घंटे तक ऑपरेशन किया। करीब साढ़े चार बजे ऑपरेशन की प्रक्रिया पूरी हो पाई है।
वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉ. बिष्ट ने बताया कि युवती के गले पर 12 सेमी लंबा, चार सेमी चौड़ा और 1.5 सेमी गहरा घाव था। उसके गले की करीब आठ नसें पूरे तरह कट गईं थी। इसके अलावा कई मांसपेशियां भी कट चुकी थीं।
गर्दन की मुख्य जुबिलर नस बाल-बाल बची थी। घर से अस्पताल लाने तक काफी मात्रा में खून भी निकल गया था। अगर मुख्य जुबिलर नस पर चाकू थोड़ा सा भी स्पर्श करता तो उसकी जान जोखिम में पड़ जाती। उसकी गर्दन में करीब 30 टांके आए हैं।
हाथ और जांघ पर भी गंभीर घाव
चिकित्सक डॉ. बिष्ट के मुताबिक युवती के दोनों हाथ की कलाई और जांघ पर भी गंभीर चोंटें लगी थीं। सर्जरी विभाग के चिकित्सकों की टीम ने उसका भी ऑपरेशन किया। युवती की हालत फिलहाल स्थिर है। उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। ऑपरेशन करने वाले डॉक्टरों की टीम में ईएनटी सर्जन डॉ. बिष्ट के साथ डॉ. प्रियंका चमोली, डॉ. आसना पंत, डॉ. पूजा, डॉ. सोफिया और डॉ. गुलसेर आदि शामिल रहे।









