नैनीताल की माल रोड पर वाहनों के बढ़ते दबाव और भूगर्भीय संवेदनशीलता के कारण दरारें चौड़ी हो रही हैं, जिससे सड़क के धंसने का खतरा बढ़ गया है। ब्रिटिश काल में केवल पैदल आवाजाही वाली यह सड़क अब सरकारी ढिलाई और बढ़ते ट्रैफिक के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही है।
नैनीताल। वाहनों के बढ़ते दबाव व भूगर्भीय संवेदनशीलता, ट्रीटमेंट के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने में ढिलाई की वजह से शहर की माल रोड में दरारों के खतरे बड़े होते जा रहे हैं। ब्रिटिशकाल में दबाव कम करने के लिए माल रोड पर केवल पैदल आवाजाही थी, 1960 के बाद माल रोड पर वाहनों का संचालन शुरू हुआ तो शहर की शान पर खतरे मंडराने लगे।
अब लगातार बारिश से लोअर के साथ ही अपर माल रोड का हाटमिक्स तक उखड़ने लगा है। झील की सुरक्षा दीवार कमजोर होने से माल रोड का बड़ा हिस्सा धंसाव की ओर अग्रसर है।
दरअसल नैनीताल पैदल चलने वालों का शहर रहा है। वर्ष 1900 व उससे पहले तक माल रोड पर केवल पैदल आवाजाही होती थी। घोड़ागाड़ी-बैलगाड़ी पर बिना अनुमति प्रवेश प्रतिबंधित था। पहली अप्रैल से 15 नवंबर तक अपर माल रोड पर पशु या सामग्री ढोने वाले कुली का तक प्रवेश वर्जित था।
सामग्री या बिना सामग्री के हस्तचलित रिक्शा तक दोपहर 12 बजे से रात आठ बजे तक प्रतिबंधित था लेकिन 60 के दशक में वाहनों का संचालन ऐसा बढ़ा और 1970 के दौर में कश्मीर में आतंकवाद की वजह से यहां का पर्यटन बढ़ा तो माल रोड के लिए बुरे दिन का दौर भी शुरू हो गया।
2015 के बाद बढ़ा बेतहाशा दबाव
शहर की अपर माल रोड की लंबाई तल्लीताल रिक्शा स्टेंड से मल्लीताल रिक्शा स्टेंड तक 1.60 किमी जबकि लोअर माल रोड की 1.45 किमी है।
राइट्स संस्था के सर्वेक्षण के अनुसार 2015 में अपर माल रोड पर रोजाना 9530 वाहनों का आवागमन हुआ। इतिहासकार प्रो. अजय रावत ने इस तथ्य को पूरी तरह भ्रामक बताया कि माल रोड पर भारतीयों के चलने पर पाबंदी थी।
अलबत्ता उन्होंने साफ किया कि उस दौर में माल रोड पर केवल गवर्नर की गाड़ी ही चलती थी। 1961 तक माल रोड पर वाहन नहीं चलते थे लेकिन जब भारत रत्न जीबी पंत चल नहीं पाते थे तो उसके बाद माल रोड पर वाहनों के संचालन की अनुमति मिली।
सरकारी ढिलाई ने भी बढ़ाए खतरे
नैनीताल: शहर की लोअर माल रोड के बुरे दिन 2018 में शुरू हुए, जब रोड का 25 मीटर हिस्सा झील में समा गया। उसके बाद शासन की उच्चस्तरीय विशेषज्ञ कमेटी ने टूटे वाले हिस्से से लेकर ऊपरी पहाड़ी तक का अध्ययन किया और ट्रीटमेंट के लिए करीब 40 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा गया लेकिन शासन ने प्रस्ताव पर औचित्य पूछा तो फिर टूटे वाले हिस्से का अस्थायी ट्रीटमेंट करना पड़ा, केवल 23 लाख की रकम ही दी गई।
अब सिंचाई विभाग की ओर से झील की सुरक्षा दीवार को भेजा गया प्रस्ताव शासन में मंजूरी के इंतजार में है। लगातार वाहनों का दबाव बढ़ा तो ट्रीटमेंट वाले हिस्से से तल्लीताल की ओर से फिर से सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया। अब लोअर के साथ ही अपर माल रोड पर चौड़ी होती दरारें खतरे को बढ़ा रही हैं।