देहरादून के मोहब्बेवाला में चार लोगों की मौत के भीषण हादसे के 24 घंटे बाद भी सड़क पर लापरवाही जारी है। आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे पर खड़े ट्रक, खुले नाले और अप्रभावी रंबल स्ट्रिप अभी भी हादसों को न्योता दे रहे हैं।
देहरादून। चार लोगों की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया, लेकिन मोहब्बेवाला में 24 घंटे बाद भी हालात नहीं बदले। दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक करीब दो किमी के दायरे में सड़क किनारे खड़े ट्रक व चौपहिया वाहन अब भी हादसों को न्योता देते नजर आए।
कहीं खुले नाले हैं तो कहीं पेड़ों के पीछे छिपे यातायात संकेतक। रफ्तार पर लगाम लगाने के दावे और रंबल स्ट्रिप लगाने की कवायद अपनी जगह है, लेकिन सड़क पर मौजूद बुनियादी खामियां जस की तस हैं। बुधवार को हुए भीषण हादसे के बाद भी जिम्मेदार तंत्र की सुस्ती साफ दिखी।
मार्ग पर सात स्थानों पर बड़े ट्रक व अन्य वाहन सड़क किनारे खड़े मिले। संकरी सड़क पर ये वाहन गुजरने वालों के लिए अतिरिक्त खतरा बने हुए हैं। सड़क के किनारे बड़े पेड़ों की वजह से संकेतक दूर से दिखाई नहीं देते। जगह-जगह खुले नाले भी दुर्घटना की आशंका बढ़ा रहे हैं। लगातार हादसों के बावजूद इन खामियों को दूर करने के लिए कोई ठोस और स्थायी इंतजाम नजर नहीं आया।
रंबल स्ट्रिप पर ब्रेक, आगे फिर रफ्तार
गुरुवार शाम 4:25 बजे आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक पड़ताल में रफ्तार पर नियंत्रण के इंतजाम भी बेअसर नजर आए।
वाहन रंबल स्ट्रिप देखकर अचानक ब्रेक लगाते दिखे, लेकिन महज 20 मीटर आगे फिर तेज रफ्तार पकड़ लेते। मोहब्बेवाला चौक पर भी यही स्थिति रही। यानी रंबल स्ट्रिप तक गति कम हुई, लेकिन उसके आगे वाहनों की रफ्तार रोकने का कोई प्रभावी इंतजाम नहीं दिखा।
सड़क किनारे खड़े ट्रक, हर पल हादसे का डर
हादसे के अगले दिन भी भारी और ओवरलोड वाहन इस मार्ग से गुजरते रहे। कुछ ट्रक सामान से लदे और झुके हुए दिखाई दिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क किनारे खड़े ट्रकों और तेज रफ्तार से गुजरते भारी वाहनों को देखकर अब सड़क पार करने और घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। उनका सवाल है कि आखिर दिन के समय भारी वाहनों की आवाजाही और सड़क किनारे पार्किंग पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही?
एक्सप्रेसवे की रफ्तार, संकरी सड़क पर बन रही जानलेवा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की चौड़ी सड़क से वाहन तेज रफ्तार में आते हैं, लेकिन आशारोड़ी पहुंचते ही सड़क संकरी हो जाती है। ढलान व चौड़ी सड़क पर बनी रफ्तार का असर आगे तक बना रहता है।
संकरे मार्ग पर अचानक गति नियंत्रित न कर पाना हादसों की आशंका बढ़ाता है। इसके बावजूद आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक रफ्तार नियंत्रित करने और भारी वाहनों को व्यवस्थित करने के ठोस इंतजाम नजर नहीं आते।
हादसे के बाद जागा विभाग, गड्ढे आनन-फानन में भरे
बुधवार को जिस स्थान पर भीषण हादसा हुआ, उसके आसपास सड़क किनारे आधा किमी के दायरे में गड्ढे बने हुए थे। हादसे के बाद विभाग ने इन्हें भरने का काम शुरू कर दिया।
सवाल यह है कि सड़क की ये खामियां हादसे से पहले जिम्मेदारों को क्यों नहीं दिखीं? चार जानें जाने के बाद ही मरम्मत की सुध क्यों आई? स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इन खामियों को दूर किया जाता तो कम से कम सड़क पर मौजूद खतरे तो कम किए जा सकते थे।
हादसों के बाद भी ट्रकों की आवाजाही पर कोई सख्ती नहीं है। हर ट्रक खतरा बनकर गुजरता है। अब तो घर से बाहर निकलने में भी डर लगता है। – पूरण सिंह असवाल, स्थानीय निवासी
हादसे रोकने के लिए प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे। अब तक किए गए इंतजाम कारगर साबित नहीं हुए हैं। – वीरेंद्र कुमार, पूर्व प्रधान
आशारोड़ी से मोहब्बेवाला तक सड़क संकरी है। इसके बावजूद सड़क किनारे गाड़ियां और ट्रक खड़े रहते हैं। कई बार इन्हें हटाने की मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
– श्याम, स्थानीय निवासी
बड़े ट्रकों के प्रवेश का समय तय होना चाहिए। दिनभर इनकी आवाजाही से खतरा बना रहता है। अब केवल दावों से काम नहीं चलेगा, सख्ती जरूरी है।
– लक्ष्मण सिंह, स्थानीय निवासी



