Big Breaking:-दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: हजारों घर तोड़ने के बजाय चुना नया रास्ता, पहले यहां बनना था सिक्सलेन

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे केवल रफ्तार नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का प्रतीक है। 2018 में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे चौड़ीकरण से हजारों घर टूटने का खतरा था।

 देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे सिर्फ विकास और रफ्तार का प्रतीक नहीं। इसके निर्माण के पीछे इन्सानियत और संवेदना की एक कहानी भी है, जो शायद किसी को मालूम हो। एक्सप्रेसवे बनाने का उद्देश्य सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ाने तक सीमित नहीं।

इसमें दिल्ली से सहारनपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे बने हजारों घरों को टूटने से बचाने का केंद्र सरकार का संकल्प भी समाहित है। यह एक्सप्रेसवे सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पीएम मोदी की उस सोच का प्रतिफल भी है, जिसमें विकास की राह घर उजाड़कर नहीं, बल्कि उन्हें बचाकर निकाली जाती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिए निर्देश

एक्सप्रेसवे के सृजन की शुरूआत दिल्ली में 27 मार्च 2018 को उस बैठक में हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर सड़क परिवहन-राजमार्ग मंत्रालय को दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाइवे का चौड़ीकरण कर छह लेन बनाने पर निर्णय लेना था। 

बैठक में जब प्रस्तावित सिक्स लेन विस्तार के धरातल पर असर की चर्चा हुई, तो सामने आया कि दिल्ली से सहारनपुर तक सड़क किनारे बने हजारों घर तोड़ने होंगे। यह सामने आते ही पूरी परियोजना की दिशा बदल गई।

यह निर्णय लिया गया कि दिल्ली-बागपत-शामली-सहारनपुर नेशनल हाइवे को सिक्स लेन के बजाय फोरलेन ही बनाया जाए, ताकि न्यूनतम भूमि की जरूरत हो और अधिकतम घर बच सकें। उधर बैठक में एक नए विचार ने आकार लिया कि दिल्ली से सहारनपुर तक नहीं बल्कि देहरादून तक सिक्सलेन कनेक्टिविटी बड़ी जरूरत है,

इसलिए दिल्ली से सहारनपुर के रास्ते देहरादून तक एक नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाए। पीम मोदी ने इस परियोजना को अपनी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल कर बजट का प्रविधान कराया।

पहले यमुना के किनारे बनाया जाना था सिक्सलेन

शुरुआत में इस एक्सप्रेसवे का रूट यमुना के किनारे-किनारे प्रस्तावित किया गया था, बाद में पर्यावरणीय और भौगोलिक कारणों से इसके मार्ग में परिवर्तन किया गया। आज जब दिल्ली से देहरादून तक का सफर आधुनिक एक्सप्रेसवे से तेज और सुगम होने जा रहा है, तो इसके पीछे छिपा यह निर्णय उतना ही अहम है, जिसने हजारों परिवारों को विस्थापन से बचाया।

संवेदनशील विकास की मिसाल है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे

एक्सप्रेसवे निर्माण की बैठक का हिस्सा रहे पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डा. सत्यपाल सिंह बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अति महत्वाकांक्षी दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे परियोजना में सरकार ने केवल सड़क निर्माण ही नहीं किया, बल्कि संवेदनशील विकास की एक मिसाल पेश की है, जहां योजना बनाते समय विकास के साथ-साथ आमजन की जिंदगी को भी केंद्र में रखा गया।

उन्होंने बताया कि दिल्ली-सहारनपुर नेशनल हाइवे फोरलेन बन चुका है, साथ ही उत्तराखंड तक सिक्सलेन एक्सप्रेसवे की सौगात पीएम मोदी देने जा रहे हैं। अब दिल्ली से देहरादून तक सड़क का जाल फैल चुका है।

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