
देहरादून में एचपीवी वैक्सीन को लेकर डर और भ्रम के कारण टीकाकरण अभियान धीमा पड़ गया है।
देहरादून। चिकित्सा विज्ञान जिस टीके को भविष्य में कैंसर से बचाव का सुरक्षा कवच बता रहा है, वही टीका उत्तराखंड में डर, भ्रम और अफवाहों के जाल में फंस गया है। सर्वाइकल कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाने वाली एचपीवी वैक्सीन को लेकर पढ़े-लिखे परिवार भी असमंजस में उलझे हुए हैं।
स्थिति यह है कि शिक्षा व जागरूकता के लिए पहचान रखने वाले देहरादून के प्रतिष्ठित स्कूलों में भी बड़ी संख्या में अभिभावक अपनी बच्चियों को टीका नहीं लगवा रहे हैं। इससे सर्वाइकल कैंसर से बचाव की केंद्र सरकार की मुहिम को झटका लगा है।
केंद्र सरकार ने 95 हजार वैक्सीन उपलब्ध कराई
फरवरी 2026 से शुरू हुए एचपीवी टीकाकरण अभियान की रफ्तार तीन महीने बाद भी नहीं बढ़ी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में 14 वर्ष तक की 1.12 लाख किशोरियां हैं, जो टीकाकरण के दायरे में आ रही हैं।
इनके टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार ने 95 हजार वैक्सीन उपलब्ध कराई हैं, लेकिन तीन महीने में मात्र नौ हजार बच्चियों को ही वैक्सीन लगाई जा सकी है। फरवरी से रोजाना टीकाकरण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है।
एचपीवी वैक्सीन दुनिया की सबसे अधिक अध्ययन की गई सुरक्षित वैक्सीनों में शामिल है। ह्यूमन पैपिलोमावायरस यानी एचपीवी संक्रमण महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। भारत में यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर बन चुका है। हर वर्ष देश में लगभग 1.20 लाख नए मामले सामने आते हैं व करीब 80 हजार महिलाओं की मौत इससे होती है। इसलिए बच्चियों को यह वैक्सीन लगाई जा रही है, ताकि भविष्य में इस कैंसर के प्रसार को रोका जा सके। – डा. रश्मि पंत, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
कैंसर बनने से पहले ही रोक देता है खतरा
यह वैक्सीन शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबाडी विकसित करती है। टीका कैंसर की प्रक्रिया को शुरुआती चरण में ही रोक देता है, जिससे कैंसर बनने का खतरा काफी कम हो जाता है। एचपीवी वैक्सीन संक्रमण रोकने में 93 से 100 प्रतिशत तक प्रभावी मानी गई, 14 वर्ष की उम्र में यह टीका लगाने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस उम्र में शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बेहतर होती है और वायरस के संपर्क में आने से पहले ही सुरक्षा तैयार हो जाती है। – मनुज गोयल, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन
आंकड़ों में एचपीवी टीकाकरण अभियान
- प्रदेश में 14 वर्ष तक की करीब 1.12 लाख किशोरियां टीकाकरण के दायरे में
- केंद्र सरकार ने 95 हजार एचपीवी वैक्सीन डोज उपलब्ध कराईं
- तीन महीने में केवल करीब 9 हजार बच्चियों को ही लग सकी वैक्सीन
- लक्ष्य के मुकाबले अब तक 10 प्रतिशत से भी कम कवरेज









