
उत्तराखंड में हरिद्वार-ऋषिकेश रैपिड रेल परियोजना के विस्तार को लेकर हलचल तेज है। मुख्यमंत्री धामी के अनुरोध के बाद, प्रधानमंत्री मोदी 14 अप्रैल को देहरादून में इसके विस्तार की घोषणा कर सकते हैं।
देहरादून। उत्तराखंड में परिवहन, पर्यटन और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही हरिद्वार-ऋषिकेश रैपिड रेल परियोजना को लेकर हलचल तेज हो गई है। कुछ दिनों पहले ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर से रैपिड रेल का विस्तार हरिद्वार-ऋषिकेश तक करने का अनुरोध किया था।
अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र माेदी 14 अप्रैल को देहरादून आ रहे हैं, तो यह माना जा रहा है कि रैपिड रेल परियोजना के विस्तार की घोषणा कर शिलान्यास किया जा सकता है।
किया जा सकता है विस्तारित
प्रस्तावित योजना के तहत दिल्ली से शुरू होने वाला क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और रुड़की होते हुए हरिद्वार और आगे ऋषिकेश तक विस्तारित किया जा सकता है। इससे न सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्तराखंड के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी स्थापित होगी, बल्कि चारधाम यात्रा के प्रमुख प्रवेश द्वार भी सीधे तेज रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।
वर्तमान में सड़क मार्ग से दिल्ली से हरिद्वार पहुंचने में चार से छह घंटे तक का समय लग जाता है, रैपिड रेल शुरू होने के बाद घटकर लगभग ढाई घंटे तक आ सकता है। इससे यात्रा न केवल तेज होगी, बल्कि यात्रा के दौरान लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं के जोखिम में भी कमी आएगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा प्रभाव चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन पर पड़ने की संभावना है। हर साल लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंचते हैं, जहां से वे बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए आगे बढ़ते हैं। रैपिड रेल के माध्यम से इन दोनों शहरों तक आसान और तेज पहुंच बनने से यात्रा अधिक सुव्यवस्थित और सुविधाजनक हो सकेगी।
इसके साथ ही पर्यटन सीजन में लगने वाले भारी ट्रैफिक दबाव से भी राहत मिलेगी। आर्थिक दृष्टि से भी यह परियोजना उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पर्यावरण के नजरिए से भी रैपिड रेल एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है।









