Big Breaking:-उत्तराखंड में बढ़ने लगी जंगल की आग, वन विभाग की वेबसाइट पर घटने लगा Forest Fire का हिसाब

उत्तराखंड वन विभाग की वेबसाइट पर जंगल की आग के आंकड़े कम दिखाए जा रहे हैं। रिपोर्टिंग अवधि 1 जनवरी से बदलकर 15 फरवरी करने से घटनाओं और प्रभावित क्षेत्र में कमी दिख रही है।

हल्द्वानी। जैसे-जैसे फायर सीजन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पूरे प्रदेश में जंगल में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। लेकिन, वनाग्नि नियंत्रण में पारदर्शिता का दावा करने वाले वन विभाग की वेबसाइट पर ही जंगल की आग के आंकड़ों को दर्शाने में साफगोई नजर नहीं आ रही है, ताकि वनाग्नि की संख्या कम दिखे।

दरअसल, इस वर्ष अप्रैल तक विभाग की वेबसाइट पर वनाग्नि के आंकड़ों का डिवीजन वार ब्योरा एक जनवरी 2026 से दिया गया था, जिस समयावधि को मई में घटा दिया गया है। अब यह आंकड़ा 15 फरवरी से दिखाया जा रहा है। समयावधि घटने से वनाग्नि के आंकड़े स्वत: कम दिख रहे हैं।

23.01 हेक्टेयर जंगल राख

मसलन, कस्तूरी मृग और हिम तेंदुए के गढ़ माने जाने वाले केदारनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन में एक जनवरी से 20 अप्रैल तक वनाग्नि की 48 घटनाएं रिपोर्ट की गई थीं, जिनमें 23.01 हेक्टेयर जंगल राख हो गया था। लेकिन अब वेबसाइट पर एक जनवरी की जगह 15 फरवरी से आंकड़े दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में केदारनाथ वाइल्डलाइफ डिवीजन में सात मई तक वनाग्नि की घटनाएं 21 दिख रही हैं, जिनमें 10.2 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है।

इसी तरह यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर स्थल घोषित नंदा देवी नेशनल पार्क में एक जनवरी से 20 अप्रैल तक वनाग्नि की नौ घटनाओं में 24 हेक्टेयर जंगल राख हुआ था।

समयावधि 15 फरवरी से किए जाने के बाद अब नंदा देवी नेशनल पार्क में वनाग्नि की एक घटना दिख रही है, जिसमें 2.5 हेक्टेयर जंगल खाक हुआ है। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक (आपदा एवं वनाग्नि प्रबंधन) सुशांत पटनायक ने बताया कि यह बदलाव साफ्टवेयर का प्रबंधन करने वाली टीम की ओर से किया गया है।

जले हुए पेड़ों की संख्या का ब्योरा देना भी बंद

वन विभाग की वेबसाइट पर पूर्व में वनाग्नि के दौरान जले हुए पेड़ों की संख्या का ब्योरा दिया जाता था। लेकिन, अब वेबसाइट से वनाग्नि के दौरान पेड़ों के जलने की संख्या का कालम ही हटा दिया गया है।

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