
उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ अपराधों में 2024 में 20% की वृद्धि दर्ज की गई है, 2068 मामले सामने आए।
देहरादून। उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में वर्ष 2024 में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में 2023 के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत अपराध में वृद्धि दर्ज की गई है।
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्ष 2022 में 1706 मामले दर्ज हुए थे, जोकि वर्ष 2023 में मामूली बढ़कर 1710 तक पहुंचे, लेकिन वर्ष 2024 में यह संख्या तेजी से बढ़कर 2068 हो गई। इस वृद्धि ने कानून-व्यवस्था और बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
20 प्रतिशत उछाल
पुलिस अधिकारियों की मानें तो मामलों में बढ़ोतरी के पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। एक ओर अपराधों में वास्तविक वृद्धि तो दूसरी ओर जागरूकता बढ़ने से अधिक मामलों का दर्ज होना।
हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि बच्चों के प्रति अपराध रोकने के लिए अभी और सख्त कदम उठाने की जरूरत है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ अपराध की दर 54.4 रही, जो राष्ट्रीय औसत की तुलना में चिंताजनक मानी जा रही है। यह दर प्रति एक लाख बच्चों की आबादी पर आधारित है और राज्य में बच्चों की सुरक्षा की स्थिति को दर्शाती है।
चार्जशीटिंग रेट यानी आरोप पत्र दाखिल करने की दर 56.1 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि पुलिस मामलों में कार्रवाई कर रही है, लेकिन केवल चार्जशीट दाखिल करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मामलों में शीघ्र न्याय सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। राज्य में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में प्रमुख रूप से यौन शोषण, अपहरण, बाल श्रम और उत्पीड़न के मामले शामिल हैं।
अपहरण के मामलों में हुई बढ़ोतरी
एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में बच्चों के अपहरण की घटनाओं में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2024 में दर्ज कुल इस वर्ष भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के तहत 217, जबकि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) के तहत 270 मुकदमे दर्ज किए गए।
इनमें 217 मामले ऐसे हैं, जिन्हें मिसिंग चिल्ड्रन डीम्ड एज किडनेप यानि गुमशुदा बच्चों को अहपरण मानते हुए दर्ज किया गया है। यह संकेत देता है कि बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बच्चों के अपहरण के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं, इनमें मानव तस्करी, बाल श्रम, बाल विवाह व पारिवारिक विवाह प्रमुख हैं। इसके अलावा किशोरों के घर से भागने के मामलों में को भी कई बार अपहरण की श्रेणी में दर्ज किया जाता है। जिससे आंकड़ों में वुद्धि दिखाई देती है।









