
जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने उत्तराखंड में कश्मीरी छात्रों और शाल कारोबारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहल की है।
देहरादून। उत्तराखंड में कश्मीरी छात्रों और शाल कारोबारियों के साथ कथित धमकियों, विरोध और हमलों की घटनाओं के बाद जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने हिन्दू संगठनों और भाजपा नेताओं के साथ संवाद की पहल की है।
संगठन का कहना है कि बातचीत और विश्वास बहाली के माध्यम से तनाव कम करने, छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उत्तराखंड की शैक्षणिक छवि को मजबूत बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।
संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने हाल ही में हिंदू रक्षा दल के नेता ललित शर्मा और भाजपा के राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल से मुलाकात कर कश्मीरी छात्रों और कारोबारियों से जुड़े मुद्दों को उठाया। छात्र संघ ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में वह बजरंग दल समेत अन्य सामाजिक और धार्मिक संगठनों से भी संवाद करेगा।
खुहामी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड में पढ़ाई कर रहे कश्मीरी छात्रों और यहां कारोबार कर रहे लोगों के भीतर असुरक्षा की भावना बढ़ी है। उनका कहना है कि कई घटनाओं के बाद अभिभावकों के बीच भी चिंता बढ़ी,
जिसका असर सीधे तौर पर छात्रों के दाखिलों पर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले तक राज्य में करीब 10 हजार कश्मीरी छात्र विभिन्न शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर रहे थे, लेकिन अब उनकी संख्या में लगभग 70 प्रतिशत तक गिरावट आई है।
व्यापक आउटरीच अभियान
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड लंबे समय से देशभर के छात्रों के लिए एक शांत और सुरक्षित शिक्षा केंद्र के रूप में पहचाना जाता रहा है। कश्मीरी छात्रों की संख्या घटने का असर केवल शैक्षणिक संस्थानों पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है।
उनके अनुसार एक छात्र औसतन सालाना करीब एक लाख रुपये खर्च करता है, जिससे किराया, परिवहन, भोजन और अन्य स्थानीय सेवाओं से जुड़े कारोबारों को भी लाभ मिलता है। छात्र संघ का कहना है कि अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमला के बाद हालात और संवेदनशील हो गए थे। उस दौरान देहरादून सहित कुछ क्षेत्रों में कश्मीरी छात्रों को लेकर विवाद, विरोध और धमकियों के मामले सामने आए।
कुछ वीडियो और बयान इंटरनेट मीडिया पर भी वायरल हुए, जिसके बाद पुलिस ने भड़काऊ भाषण देने के आरोप में ललित शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। खुहामी ने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और कश्मीरी समाज हमेशा देश की एकता, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, व्यापार, सेना, प्रशासन और विभिन्न क्षेत्रों में कश्मीरियों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
ऐसे में छात्रों और कारोबारियों से जुड़ी तनावपूर्ण घटनाएं न केवल आपसी विश्वास को प्रभावित करती हैं, बल्कि उत्तराखंड जैसे शांत राज्य की छवि पर भी असर डालती हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने एक व्यापक आउटरीच अभियान शुरू किया है।
इसके तहत विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षण संस्थानों से मुलाकात कर संवाद स्थापित किया जाएगा। इसी क्रम में 23–24 मई को छात्र संघ का प्रतिनिधिमंडल फिर उत्तराखंड आएगा। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, डा रमेश पोखरियाल निशंक और बजरंग दल के अध्यक्ष विकास वर्मा से मुलाकात प्रस्तावित है।









