
सितारगंज में भाई के निकाह की तैयारियों के बीच किच्छा हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
सितारगंज । घर में निकाह की तैयारियां अपने पूरे शबाब पर थीं। आंगन में रौनक बिखरी हुई थी, रिश्तेदारों का आना-जाना लगा था। महिलाएं मेंहदी और रस्मों की तैयारियों में जुटी थीं, जबकि बुजुर्ग मेहमानों की आवभगत में व्यस्त थे।
हर तरफ खुशियों की गूंज थी और दुआओं के बीच एक नए रिश्ते की शुरुआत का इंतजार किया जा रहा था। लेकिन किच्छा हाईवे पर हुए दर्दनाक हादसे ने इस घर की सारी खुशियां एक ही पल में छीन लीं।
गूंजनी थीं ‘निकाह मुबारक’ की आवाजें
हिना, निशा और रूबी अपने भाई के निकाह की तैयारियों के लिए सितारगंज बाजार गई थीं। घर में उनके लौटने का बेसब्री से इंतजार हो रहा था, ताकि आगे की रस्में पूरी की जा सकें।
किसी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह इंतजार कभी खत्म नहीं होगा। जैसे ही हादसे और फिर हिना व निशा की मौत की खबर घर पहुंची, खुशियों से गूंजता आंगन अचानक चीख-पुकार से भर उठा।
जिस घर में ‘निकाह मुबारक’ की आवाजें गूंजनी थीं, वहां मातम का सन्नाटा पसर गया। खुशी में शरीक होने आए रिश्तेदार अब गम में डूबे परिजनों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। हर आंख नम है और हर जुबान पर बस एक ही दुआ- “या अल्लाह, ये कैसी कड़ी परीक्षा है…”।
हादसे के समय मां की गोद में थी नौ माह की मासूम
सबसे मार्मिक दृश्य तब सामने आया, जब निशा की महज 9 महीने की मासूम बेटी को परिजनों ने सीने से लगाया। हादसे के वक्त वह अपनी मां की गोद में थी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
मां के चले जाने के साथ ही उस मासूम के सिर से ममता का साया हमेशा के लिए उठ गया। अब वह बच्ची, जो हर पल मां की गोद में सुरक्षित महसूस करती थी, जिंदगी भर उसी ममता के लिए तरसेगी। यह दृश्य देख मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
खुशियों के आंगन में पसरा मातम
घर में जहां निकाह की तैयारियों के तहत साज-सज्जा की जा रही थी, वहीं अब जनाजे की तैयारी शुरू हो गई। दूल्हे के घर से उठने वाली बारात की जगह अब बेटियों के जनाजे उठने की तैयारी ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया। खुशियों से सजा आंगन अब गमगीन खामोशी में डूब गया है।
हमेशा के लिए छीन गईं परिवार की खुशियां
गांव और आसपास के इलाकों में भी इस हादसे को लेकर गहरा शोक है। लोग इसे महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा दर्दनाक हादसा मान रहे हैं, जिसने एक परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया।
यह हादसा उन जिंदगियों की अधूरी कहानी बन गया है, जो खुशियां खरीदने निकली थीं, लेकिन अपने पीछे आंसुओं का समंदर छोड़ गईं। अब इस घर में दुआओं के लिए उठने वाले हाथ भी आंसुओं से भीगे हैं…।









