Big Breaking:-फूल की 36 वर्ग फीट की दुकान का किराया 1.70 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष, हरिद्वार में गंगा घाटों पर Shops का रिकॉर्ड तोड़ रेंट

नगर निगम हरिद्वार ने गंगा घाटों पर फूल फरोशी की छह दुकानों के लिए करीब चार करोड़ रुपये की न्यूनतम बोली निर्धारित की है। एक 36 वर्ग फीट की दुकान का किराया 1.70 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच गया है, जिसके लिए 28 मई तक टेंडर डाले जाएंगे।

हरिद्वार। नगर निगम ने गंगा घाटों और पुलों के आसपास फूल फरोशी की 36-36 वर्ग फीट की छह दुकानों के लिए करीब चार करोड़ रुपये न्यूनतम बोली निर्धारित की है। ये ठेके एक वर्ष के लिए छोड़े जाएंगे और इनसे नगर निगम को चार करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी होगी।

सबसे महंगे ठेके में घंटाघर से पंतद्वीप जाने वाले पुल की सीढ़ी के साथ 36 वर्ग फीट की न्यूनतम बोली 1.70 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। जबकि विष्णु घाट से ललतारौ पुल के ठेके की न्यूनतम बोली करीब 4.96 लाख रुपये तय की गई है।

नगर निगम ने छह दुकानों के लिए निर्धारित की करीब चार करोड़ की न्यूमतम बोली

धर्मनगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण फूल फरोशी का कारोबार काफी लाभदायक माना जाता है। कांवड़ यात्रा, स्नान पर्व और त्योहारों में फूलों की काफी मांग रहती है। अगले वर्ष अर्धकुंभ का आयोजन भी होना है। ऐसे में नगर निगम की ओर से विभिन्न घाटों पर फूल बेचने के लिए 36-36 वर्ग फीट आकार के स्थल आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए 28 मई तक टेंडर डाले जाएंगे। इसी दिन टेंडरों को खोला जाएगा।

सबसे अधिक बोली लगाने वाले को ठेका मिलेगा

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार मालवीय द्वीप जाने वाले पुल के साथ वाले स्थल की न्यूनतम दर 1.32 करोड़ रुपये रखी गई है। नाईसोता घाट नाले के पास 57.76 लाख रुपये, महिला घाट जाने वाली सीढ़ी के पास 18.26 लाख,

सीसीआर घाट के निकट पार्क में 18.97 लाख रुपये न्यूनतम बोली तय की गई है। सबसे अधिक बोली लगाने वाले को ठेका मिलेगा। बोली की 25 प्रतिशत धनराशि एक सप्ताह में और शेष धनराशि तीन समान किश्तों में दो-दो माह के अंतराल पर अग्रिम रूप से जमा करानी होगी।

इस बार सख्त हैं नियम और शर्तें

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार इस बार सख्त शर्तें लागू की गई हैं। ठेकेदार को स्थल पर केवल फूल ही बेचने की अनुमति होगी। किसी अन्य सामग्री की बिक्री या आवंटित स्थान से बाहर फूल बेचने पर ठेका तुरंत निरस्त कर दिया जाएगा। ठेकेदार को रोशनी और अन्य सुविधाएं अपने खर्च पर जुटानी होंगी। स्थल पर गंदगी पाए जाने पर जुर्माना भी वसूला जाएगा। नगर निगम और प्रशासन को यदि आवंटित स्थल की जरूरत होगी तो ठेकेदार को तत्काल खाली करना होगा।

ठेकों को लेकर पूर्व में हो चुके हैं विवाद

पिछले वर्षों में फूल फरोशी ठेकों को लेकर कई बार विवाद भी हो चुके हैं। अवैध फूल विक्रय, ठेकेदारों की मिलीभगत और छोटे दुकानदारों के विरोध के मामले सामने आते रहे हैं। वर्ष 2021 में गंगा घाटों के फूल फरोशी ठेके दो साल बाद 1.97 करोड़ रुपये में दिए गए थे। तब फूल-प्रसाद के छोटे विक्रेताओं ने प्रक्रिया का विरोध किया था।

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