
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में नियमित तबादले ठप होने के बावजूद ‘कार्ययोजित आदेश’ के माध्यम से चुनिंदा शिक्षकों के स्थानांतरण हो रहे हैं।
देहरादून। शिक्षा विभाग सीखने के प्रतिफल जैसे राष्ट्रीय मानकों में भले ही बहुत पीछे हो, लेकिन चहेतों और रसूखदार शिक्षकों की मनचाही तैनाती को लेकर विभाग की प्रगति शानदार रहती है।
वार्षिक, अनिवार्य या अनुरोध आधार पर तबादले करीब दो साल से ठप हैं, लिहाजा पहुंच रखने वाले शिक्षकों के लिए एक चौथा विकल्प कार्ययोजित आदेश के रूप में शुरू किया गया है। तबादलों का यह द्वार विशेष परिस्थितियों में ही कुछ समय के लिए खोला जाता है।
कार्ययोजित आदेश के माध्यम से तबादलों के पत्र को आजकल शिक्षक इंटरनेट मीडिया में प्रसारित कर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार में बीमारी व अन्य कारणों से सैकड़ों शिक्षक प्रभावित हैं, फिर भी चंद शिक्षकों की ही कार्ययोजित कैसे हो रही हैं।
शिक्षकों के बीच इस विषय को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। कई शिक्षक यह सवाल उठा रहे हैं कि जब सामान्य तबादला प्रक्रिया लंबे समय से बंद है तो कार्ययोजित के माध्यम से चुनिंदा शिक्षकों को राहत कैसे मिल रही है।
उधर, माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. मुकुल कुमार सती का कहना है कि यह कार्रवाई शिक्षा महानिदेशालय के आदेश के बाद आगे बढ़ाई गई है।
कार्ययोजित आदेश के लाभार्थी शिक्षक
अटल उत्कृष्ट राजकीय इंटर कालेज घोड़ापुरी टिहरी गढ़वाल से जीव विज्ञान के प्रवक्ता अनिल नौटियाल राजकीय इंटर कालेज हरबर्टपुर लाए गए। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कांडानौला अल्मोड़ा की एलटी अंग्रेजी शिक्षक किरन ज्योति को राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय हर्रावाला, देहरादून में तैनाती दी गई।
राजकीय इंटर कालेज दयूरी चंपावत की एलटी कला शिक्षिका नंदी डांगी को राइंका खुरियाखत्ता नैनीताल में कार्ययोजित किया गया है।
इसके 31 मार्च, 2026 को राजकीय इंटर कालेज गुजराड़ा से भौतिक विज्ञान प्रवक्ता सेवानिवृत्त हुए और एक अप्रैल, 2026 को एससीईआरटी से शिक्षिका आशा नगोटी रमोला ने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया। दूसरी ओर, तबादले न्यायालय में मामला विचाराधीन होने से पूरी तरह बाधित हैं।









