
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने यूपीसीएल द्वारा अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही के लिए बिजली खरीद लागत समायोजन के तहत 59.17 करोड़ रुपये की वसूली को मंजूरी दी है।
देहरादून। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले ईंधन व बिजली खरीद लागत के समायोजन को लेकर बड़ा फैसला दिया।
यूइआरसी ने यूपीसीएल द्वारा अक्टूबर से दिसंबर, 2025 तिमाही के लिए वसूल की गई बिजली खरीद लागत के समायोजन को सही माना और 59.17 करोड़ की समायोजित वसूली को मंजूरी दी है।
आयोग ने माना कि बिजली खरीद लागत में उतार-चढ़ाव का तत्काल समायोजन वितरण कंपनी की वित्तीय सेहत बनाए रखने के लिए जरूरी है, ताकि बाद में ट्रू-अप के दौरान उपभोक्ताओं पर एकमुश्त बड़ा बोझ न पड़े।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मंजूरी अंतरिम प्रकृति की है और अंतिम सत्यापन आडिटेड खातों के आधार पर होगा।
यूपीसीएल ने सात अप्रैल, 2026 को आयोग के समक्ष याचिका दाखिल कर अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर 2025 के दौरान बढ़ी हुई बिजली खरीद लागत के आधार पर उपभोक्ताओं से वसूले गए बिजली लागत समायोजन की पोस्ट-फैक्टो मंजूरी मांगी थी।
कंपनी के अनुसार इस तिमाही में कुल अतिरिक्त बिजली खरीद लागत 59.17 करोड़ रही, जबकि उपभोक्ताओं से वास्तविक वसूली 60.56 करोड़ हुई।
इस प्रकार 1.39 करोड़ की ओवर रिकवरी सामने आई, जिसे आयोग ने आगामी बिलिंग चक्र में समायोजित करने की अनुमति दी है।
सुनवाई के दौरान औद्योगिक उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि यूपीसीएल समायोजन दरों की जानकारी उसी महीने जारी करता है, जब वह वसूली शुरू कर देता है।
इससे उद्योगों को बिजली खर्च का पूर्वानुमान लगाने में दिक्कत होती है। इस पर आयोग ने यूपीसीएल को निर्देश दिया कि वह हर महीने की समायोजन दरों की जानकारी अधिकतम पिछली महीने की 28 तारीख तक सार्वजनिक करे।









