Big Breaking:-उत्तराखंड के टिहरी में खोदाई में मिले हथियार प्राचीन युद्ध भंडार का हिस्सा, एएसआई रिपोर्ट में हुआ खुलासा

टिहरी गढ़वाल में 2015 में सड़क निर्माण के दौरान मिले हथियारों के जखीरे की एएसआई ने जांच पूरी कर ली है। रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि ये उन्नत धातुकर्म वाले प्राचीन युद्ध भंडार का हिस्सा हो सकते हैं।

देहरादून। टिहरी गढ़वाल में सड़क निर्माण के दौरान वर्ष 2015 में मिले हथियारों के जखीरे से रहस्य की परत हटने लगी है।

लंबी जद्दोजहद के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की विज्ञान शाखा ने हथियारों की जांच पूरी कर ली है।

अभी तक के अध्ययन में इनकी अवधि का पता नहीं चल पाया है, लेकिन ऐसे संकेत मिले हैं कि ये आम औजार नहीं, बल्कि हथियारों के भंडार का हिस्सा हो सकते हैं।

वर्ष 2015 में टिहरी के पिपोला ढुंग क्षेत्र से कुल 94 हथियार-औजार मिले थे। जांच के इंतजार में लंबे समय तक इन्हें एएसआइ के उत्तराखंड सर्किल कार्यालय में रखा गया। इनकी पहचान को लेकर देहरादून निवासी राजू गुसाईं ने आरटीआइ में जानकारी मांगी थी।

उन्होंने विभिन्न अंतराल में एएसआइ के साथ पत्राचार जारी रखा। जिसके बाद अधिकारियों ने जांच कराने का निर्णय ले लिया। अब राजू गुसाईं के ही एक आरटीआइ आवेदन के जवाब में एएसआइ की विज्ञान शाखा ने तीन पेज की रिपोर्ट भेजी है।

जिसमें कहा गया है कि हथियारों में लोहे के साथ पीतल (ब्रास) जैसी मिश्र धातुओं का भी प्रयोग किया गया है, जो उस समय की उन्नत धातुकर्म तकनीक का भी संकेत है।

रिपोर्ट के अनुसार हथियारों की जांच हैंडहेल्ड एक्सआरएफ (एक्सरे फ्लूरोसाइंस) अलोय एनालाइजर के माध्यम से की गई। यह के आधुनिक तकनीक है, जिससे किसी धातु को काट या नुकसान पहुंचाए बिना उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाया जाता है।

हथियारों में 87 प्रतिशत तक लोहा

जांच रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर हथियारों में लोहे की मात्रा 48 से 87.02 प्रतिशत तक पाई गई। सबसे खास बात यह रही कि कुछ हथियारों में तांबा और जिंक की काफी मात्रा मिली।

विज्ञानियों के अनुसार विशेष उपयोगिता के लिए ऐसा जानबूझकर किया जाना प्रतीत होता है। साथ ही जानकारी मिलती है कि प्राचीन युग में कारीगर केवल लोहे का ही नहीं, बल्कि मिश्र धातु का भी उपयोग जानते थे।

एक ही स्थान पर बड़ी संख्या में हथियारों के मिलने से माना गया कि यह किसी सैनिक भंडार, युद्ध तैयारी केंद्र या सामूहिक संग्रह का हिस्सा हो सकते हैं।

चूंकि उत्तराखंड का पर्वतीय क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से कई प्राचीन व्यापारिक मार्गों, जनजातीय संस्कृतियों और युद्ध परंपराओं का हिस्सा रहा है। ऐसे में ये हथियार उन तमाम बातों के अहम प्रमाण हो सकते हैं।

इन हथियारों की जांच की गई

तलवारें, भाले, हार्पून, चाकू, लोहे की चेन, छल्लेदार धातु वस्तुएं, हथियारों के टूटे भाग, तलवार की मूठ (हैंडल), क्रासगार्ड और क्विलान ब्लाक के हिस्से। हथियारों की कुल लंबाई 07 से 26 सेंटीमीटर के बीच पाई गई।

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