
उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी, गैस की कमी और कम जलस्तर के कारण बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है, जिससे 321 मेगावाट उत्पादन प्रभावित हुआ है।
देहरादून। गर्मी के बढ़ते प्रकोप, अंतरराष्ट्रीय हालात और ऊर्जा संसाधनों की कमी के बीच उत्तराखंड में भी बिजली आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
इस स्थिति में उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड ने विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के लिए कमर कस ली है।
ऊर्जा विभाग के मुताबिक, इस समय कई तरह की चुनौतियां सामनें हैं। गर्मी के चलते बिजली की मांग में तेज उछाल आया है, वहीं गैस की सीमित उपलब्धता के कारण राज्य के 321 मेगावाट गैस आधारित संयंत्रों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
नदियों में जल स्तर कम होने से जल विद्युत उत्पादन भी घटा है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में औसतन पांच प्रतिशत मांग बढ़ने के साथ ही इंडक्शन कुकर और अन्य विद्युत उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से 50 से 100 मेगावाट तक अतिरिक्त लोड भी जुड़ गया है।
यूपीसीएल ने एडवांस पावर प्रोक्योरमेंट, लोड मैनेजमेंट और रियल-टाइम मानिटरिंग के जरिए आपूर्ति को संतुलित रखने की रणनीति अपनाई है।
लोड डिस्पैच सेंटर के साथ समन्वय बनाकर पीक डिमांड को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि उपभोक्ताओं को सामान्य रूप से बिजली मिलती रहे। राज्य सरकार के प्रयासों से केंद्र से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
केंद्रीय ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल ने 150 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा पहले से ही अप्रैल, मई और जून के लिए केंद्रीय पूल से अतिरिक्त बिजली आवंटित है। ऊर्जा एक्सचेंज से भी एडवांस बिजली खरीद की व्यवस्था की गई है।
इसके तहत एक से 15 मई तक 100 मेगावाट और 16 से 31 मई तक 225 मेगावाट बिजली खरीद सुनिश्चित की गई है। यूपीसीएल का कहना है कि मई और जून में जल विद्युत उत्पादन बढ़ने के साथ स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
प्रमुख सचिव ऊर्जा डा. आर मीनाक्षी सुंदरम ने अधिकारियों के साथ बैठक कर आपूर्ति व्यवस्था का जायजा लिया।
बैठक में पावर मैनेजमेंट को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक जी एस बुदियाल ने उपभोक्ताओं से 30 अप्रैल तक बिजली बचत में सहयोग की अपील की है।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि एक मई से बेहतर प्रबंधन के जरिए प्रदेश में सुचारु और गुणवत्ता युक्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दी जाएगी।









