
उत्तराखंड एसटीएफ ने ऑनलाइन नकली जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, जो नामी कंपनियों के नाम पर नकली दवाएं बेच रहे थे।
देहरादून। उत्तराखंड एसटीएफ ने ऑनलाइन नकली जीवन रक्षक दवाओं की सप्लाई करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। ऑपरेशन फेक पिल के तहत की गई कार्रवाई में एसटीएफ ने गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जो नामी दवा कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां बेच रहे थे।
एसटीएफ ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन देहरादून में मुकदमा दर्ज कर आरोपितों के खिलाफ संगठित अपराध, धोखाधड़ी, जालसाजी, कॉपीराइट उल्लंघन, आईटी एक्ट और एनडीपीएस एक्ट की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की है।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान संभल उत्तर प्रदेश निवासी जतिन सैनी और जीएमएस रोड देहरादून निवासी गौरव त्यागी के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार गौरव त्यागी के खिलाफ पहले भी हरिद्वार, देहरादून और महाराष्ट्र में नकली दवाओं से जुड़े मुकदमे दर्ज हैं।
एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि जांच के दौरान एसके हेल्थ केयर नामक फेसबुक पेज के जरिये Sun Pharma, Glenmark, Zydus, Mankind, Torrent और Macleods जैसी कंपनियों के नाम पर नकली दवाइयां आधे से कम दाम में बेची जा रही थीं। गिरोह उत्तराखंड समेत बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ में सक्रिय था।
जांच में सामने आया कि आरोपित ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग की हूबहू नकल कर नकली दवाइयां तैयार करते थे और उन्हें ऑनलाइन बेचते थे। कई दवा विक्रेता भी अधिक मुनाफे के लालच में इन दवाओं को खरीदकर बाजार में असली कीमत पर बेच रहे थे। लैब जांच में दवाइयां फेल पाई गईं, जिससे मरीजों की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।
पूछताछ में गौरव त्यागी ने खुलासा किया कि रुड़की में उसकी नकली दवा फैक्ट्री पहले भी पकड़ी जा चुकी है। फिलहाल वह भगवानपुर हरिद्वार और कोटद्वार में अलग-अलग स्थानों पर नकली दवाइयों का निर्माण करा रहा था। कोटद्वार स्थित फैक्ट्री को केवल निर्माण के समय ही खोला जाता था। एसटीएफ और ड्रग विभाग की टीमें दोनों स्थानों पर कार्रवाई में जुटी हैं।
एसटीएफ ने काल्पनिक ग्राहक बनकर फेसबुक पेज से दवाइयां मंगाईं। इसके बाद मैनकाइंड कंपनी की Gudcef Plus और सनफार्मा की Tydol-100 नाम से नकली दवाइयां कोरियर के जरिये देहरादून भेजी गईं। इसी आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। अब एसटीएफ गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और विभिन्न राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है।









