Big Breaking:-उत्तराखंड में राहुल गांधी का दौरा: कलह पर अंकुश के आसार, चतुर्भुज नेतृत्व और हरदा के बीच सधेगा संतुलन

राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे से कांग्रेस की अंदरूनी कलह सुलझाने और सामूहिक नेतृत्व व हरीश रावत के बीच संतुलन बनाने की उम्मीद है।

देहरादून। उत्तराखंड में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर अंकुश लगाना केंद्रीय नेतृत्व की प्राथमिकता बन गई है। प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा के अब तक हुए दो चुनावी दौरे में इस समस्या का कारगर समाधान नहीं निकल पाया। अगले विधानसभा चुनाव में पूरी पार्टी को एकजुट करने का दारोमदार आखिरकार शीर्ष नेतृत्व पर ही आ गया है।

राहुल गांधी अगले सप्ताह या पखवाड़े के भीतर चुनावी शंखनाद के लिए यहां आ रहे हैं। राहुल के प्रस्तावित दौरे से कार्यकर्ताओं का मनोबल तो बढ़ेगा ही, साथ में प्रदेश में चुनावी मोर्चे के लिए तैयार किए गए चतुर्भुज नेतृत्व और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच संतुलन बनेगा, इसे लेकर उम्मीदें प्रबल होती दिख रही हैं।

कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई

उत्तराखंड में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए अस्तित्व की लड़ाई है। विधानसभा के चुनावी रण को रोमांचक बनाने के लिए केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, प्रदेश कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डा. हरक सिंह रावत को चतुर्भुज नेतृत्व के तौर पर आगे बढ़ाया है।

दूसरी ओर, इस चौकड़ी से अलग पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत यानी हरदा अपनी राह चल रहे हैं। उत्तराखंड राज्य बने हुए 25 वर्ष की अवधि में ऐसा संभवत: पहली बार होगा, जब हरीश रावत को चुनाव के दृष्टिगत महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिली।

प्रदेश अध्यक्ष की गद्दी हिलने से बढ़ी चिंता

प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा उत्तराखंड का दो बार दौरा कर चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने चतुर्भुज नेतृत्व को साथ रखा। एकजुटता को लेकर प्रभारी के संदेश और नसीहत के बावजूद प्रदेश अध्यक्ष की गद्दी हिलाने की ऐसी कहानी सामने आईं, जिसने पार्टी को भी चिंता में डाला।

ऐसे में सामूहिक नेतृत्व को आगे बढ़ाने का पार्टी हाईकमान का प्रयोग कामयाब रहेगा या इसकी राह मुश्किलों से भरी रहने वाली है, इसे लेकर सियासी गलियारों में कयास लगने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस के सामने भाजपा है।

राज्य में सत्ता की हैटट्रिक को ध्यान में रखकर भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह चुनावी बिगुल फूंक चुके हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस की स्थिति उलट है। कांग्रेस के एक भी शीर्ष नेता ने अब तक उत्तराखंड का रुख नहीं किया। अब राहुल के दौरे से नई आस बंधी है। माना जा रहा है कि इस क्रम में राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभाएं आगामी दिनों में तय की जा सकती हैं।

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