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Big Breaking:-उत्तराखंड के कुमाऊं के जंगलों में कितने हाथी? 20 मई से शुरू हो जाएगी गजराज की गणना

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में 20 मई से हाथियों की गणना शुरू होगी, जिसमें आधुनिक प्रत्यक्ष विधि का उपयोग किया जाएगा। यह गणना छह साल बाद हो रही है।

रामनगर (नैनीताल)। छह साल बाद उत्तराखंड के जंगलों में होने जा रही हाथी गणना प्रत्यक्ष विधि से 20 मई से होगी, जिसमें आधुनिक तकनीक की मदद ली जाएगी। गुरुवार को कार्बेट टाइगर रिजर्व के सभागार में कार्बेट समेत कुमाऊं के वनाधिकारियों व स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण में कार्बेट टाइगर रिजर्व, तराई पश्चिमी वन प्रभाग व रामनगर वन प्रभाग के वनाधिकारी व कर्मचारी प्रत्यक्ष व हल्द्वानी, तराई केंद्रीय, तराई पूर्वी, नैनीताल, अल्मोड़ा, चंपावत, अल्मोड़ा, कालागढ़ वन प्रभागों के वनाधिकारी व स्टाफ वर्चुअल माध्यम से प्रशिक्षण से जुड़े।

हाथी गणना के लिए कार्बेट निदेशक डा. साकेत बडोला को कुमाऊं जोन का समन्वयक अधिकारी बनाया गया है। प्रशिक्षण में भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून के विशेषज्ञ मुकेश चंद्र, अंशुमन गोगोई व आशीष प्रसाद ने वैज्ञानिक पद्धतियों के संबंध में प्रशिक्षण दिया।

हाथी गणना 20 मई से 30 जून के बीच में होगी। कुमाऊं के समन्वयक अधिकारी व कार्बेट निदेशक डा. बडोला ने कहा कि प्रशिक्षण हाथी गणना के लिए महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।

कार्बेट में हाथी गणना 26 मई से 30 जून तक की जाएगी। अन्य वन प्रभाग अपनी सुविधा के हिसाब से गणना कर सकते हैं। हाथी गणना पूरी होने के बाद संकलित डाटा भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा।

इस दौरान उपनिदेशक राहुल मिश्रा, पार्क वार्डन बिंदर पाल, कालागढ़ एसडीओ अमित ग्वासीकोटी, तराई के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या, एसडीओ अंकित बडोला समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

हाथी गणना में यह जानकारी करनी होगी दर्ज

हाथी गणना बीट वार पांच दिन तक लगातार चलेगी। जंगल में पांच किलोमीटर तक सीधी लाइन में चलकर वहां प्रत्यक्ष दिखने वाले हाथियों की पूरी जानकारी मोबाइल फोन में एम स्ट्राइप्स इकालोजी एप में दर्ज करनी होगी।

हाथियों की कुल संख्या, नर है या मादा, कितनी आयु ग्रुप के हैं, बच्चे कितने हैं, दूरी व लोकेशन आदि जानकारी मोबाइल एप में भरनी होगी।

भारतीय वन्य जीव संस्थान के विशेषज्ञ भी हाथी गणना में रहेंगे। इससे पहले वर्ष 2020 में हाथी गणना हुई थी। जिसमें कार्बेट में 1224 हाथी मिले थे। गढ़वाल में प्रशिक्षण पूर्व में राजाजी टाइगर रिजर्व में हो चुका है।

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