Big Breaking:-देहरादून: आशारोड़ी-झाझरा बाईपास का 44% निर्माण पूरा, 2027 तक ट्रैफिक होगा आसान

देहरादून में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत बन रहे 12 किमी लंबे आशारोड़ी-झाझरा बाईपास का 44% काम पूरा हो गया है।

देहरादून। राजधानी में लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव के बीच राहत की एक बड़ी उम्मीद आकार ले रही है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कारिडोर के हिस्से के रूप में 12 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड बाईपास का निर्माण तेज कर दिया है।

जिसका उद्देश्य शहर के भीतर आने वाले भारी ट्रांजिट ट्रैफिक को बाहर ही डायवर्ट करना है।

करीब 716 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह चार-लेन, एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्ग अब तक लगभग 44 प्रतिशत पूरा हो चुका है। परियोजना को वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

शहर से बाहर इस तरह निकलेगा ट्रांजिट ट्रैफिक

यह नया मार्ग झाझरा से शुरू होकर आशारोड़ी के पास इकोनामिक कारिडोर से जुड़ेगा। खास बात यह है कि इससे बाहर से आने वाले वाहन देहरादून शहर में प्रवेश किए बिना ही अपने गंतव्य की ओर बढ़ सकेंगे।

इससे शहर के प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव स्पष्ट रूप से कम होने की उम्मीद है। खासकर दिल्ली और पांवटा साहिब की तरफ आवागमन करने वाले वाहनों को शहर में प्रवेश करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

साथ ही मसूरी बाईपास के रूप में प्रस्तावित 43 किमी लंबी सड़क परियोजना के बाद दूसरे राज्यों के वाहनों को मसूरी जाने के लिए इसी राजमार्ग पर निर्भर रहना होगा। जिससे दून शहर में वाहनों का दबाव एकदम से कम हो जाएगा।

औद्योगिक और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को मिलेगा बूस्ट

यह बाईपास सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र, विकासनगर, हरबर्टपुर और पांवटा साहिब जैसे प्रमुख क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी देगा। साथ ही हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के बीच मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी तेज़ और सुगम होगी।

ग्रीनफील्ड में पर्यावरण संतुलन पर विशेष फोकस किया

परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। सड़क की अधिकतम डिजाइन गति 100 किमी/घंटा रखी गई है, जबकि वन क्षेत्रों में इसे घटाकर 80 किमी/घंटा किया गया है। राइट आफ वे को सीमित रखते हुए पेड़ों की कटाई कम से कम रखने की योजना बनाई गई है।

गए हैं सुरक्षित रास्ते

यह बाईपास केवल ट्रैफिक समाधान नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन का भी उदाहरण बनेगा। परियोजना में 350 मीटर लंबा व्हीक्युलर ओवरपास, एक कैटल ओवरपास, सात छोटे पुल, 21 बाक्स कल्वर्ट और पांच ह्यूम पाइप कल्वर्ट बनाए जा रहे हैं, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित बनी रहे।

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