Big Breaking:-उत्तराखंड में गरजा धामी का Bulldozer, किच्छा के धौराडाम और शाहदौरा में दो अवैध मजार की ध्वस्त

सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर किच्छा के धौराडाम और शाहदौरा में बनी दो अवैध मजारों को धामी के बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।

किच्छा (ऊधम सिंह नगर)। सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए अवैध मजारों पर धामी का बुलडोजर लगातार कहर बरपा रहा है।

सोमवार को किच्छा क्षेत्र के धौराडाम और शाहदौरा में अतिक्रमण कर बनाई गई दो अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया गया।

यह कार्रवाई भोर होने से पहले की गई, जिसमें सभी प्रमुख और छोटे रास्तों को बंद कर दिया गया था। इस दौरान एसडीएम, तहसीलदार और भारी पुलिस बल मौजूद रहा।

दिन निकलने के साथ ही लोगों को कार्रवाई की जानकारी मिली, जिससे हड़कंप मच गया। हालांकि, पुलिस और प्रशासन की सतर्कता के कारण कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।

तराई पूर्वी वन प्रभाग हल्द्वानी के अंतर्गत बाराकोली वन क्षेत्र में 0.25 हेक्टेयर भूमि पर अवैध रूप से मजारों का निर्माण किया गया था।

वन विभाग ने सोमवार को अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा था। एसडीएम गौरव पांडेय और तहसीलदार जीसी त्रिपाठी की अगुआई में दो टीमें वन विभाग और पुलभट्टा थाने के पुलिस फोर्स के साथ अपने निर्धारित स्थलों पर पहुंच गईं।

प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए पूरी रणनीति तैयार की थी, जिसके तहत दोनों अवैध मजार को लोडर मशीन से ध्वस्त कर दिया गया।

इस कार्रवाई ने अतिक्रमणकारियों को कड़ा संदेश दिया है। ध्वस्तीकरण के दौरान चारों ओर घेराबंदी की गई थी, जिससे किसी बाहरी व्यक्ति को वहां आने-जाने की अनुमति नहीं थी।

प्रशासन ने बिना किसी विरोध का मौका दिए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की, जिससे अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया।

व्यक्तिगत मोबाइल रखवाए दूर की वीडियोग्राफी

प्रशासन ने योजनाबद्ध तरीके से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस व प्रशासन की टीमों को व्यक्तिगत मोबाइल दूर रखने के निर्देश दिए थे।

प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी करवाई। लगभग चार घंटे तक प्रशासन ने पूरी सतर्कता के साथ पूरे सुरक्षा इंतजाम के साथ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में जुटा रहा।

वन भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध मजार बना दी गई थीं, जिन्हें ध्वस्त कर वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया है। इससे पूर्व भी 214 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त करवाया गया है।

– सावित्री गिरी, उप प्रभागीय वन अधिकारी सितारगंज

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